जबलपुर। दुनिया भर की प्राचीन भाषाओं में से एक देवभाषा संस्कृत की जड़ें मजबूत करने के लिए देशभर के साथ महाकौशल प्रांत के 29 जिलों में भी खास 'पाठशालाएं चलेंगी। इनमें संस्कृत सिखाई जाएगी। 23 सितम्बर से 'संस्कृत भारती नामक संगठन की ओर से सरल, सहज तरीके से संस्कृत के पाठ पढ़ाए जाएंगे। इसमें किसी भी आयु और वर्ग के लोग शामिल हो सकते हैं, इसका कोई शुल्क नहीं होगा। गढ़ा फाटक स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में यह कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं।
मथुरा में हुई थी बैठक
फरवरी माह में संस्कृत भारती की अखिल भारतीय बैठक मथुरा में हुई थी। इसमें तमाम पदाधिकारी शामिल हुए थे। उसमें मंथन के दौरान यह बात सामने आई कि अमेरिका, चीन, रूस, जापान, आस्ट्रेलिया में तो संस्कृत पर शोध किए जा रहे हैं, लेकिन भारत में इसे लोग भूलते जा रहे है। बैठक में तय हुआ कि महाकोशल प्रांत के अंतर्गत आने वाले 29 जिलों में एक-एक संस्कृत शिक्षक संस्कृत सम्भाषण की कक्षा लेंगे। यह एक तरह का शिविर होगा। प्रत्येक जिले में 30 शिक्षार्थियों की अनिवार्यता रखी गई है।
इन जिलों में लगेगी पाठशाला
जबलुपर, छिंदवाड़ा, बालाघाट, सिवनी, नरसिंहपुर, मंडला, डिंडोरी, रीवा, सतना, शहडोल, उमरिया, छतरपुर, पन्ना, सागर, दमोह, ङ्क्षसगरौली, कटनी, अनूपपुर, सीधी, टीकमगढ़, मैहर आदि जिलों में तीन से शाम छह बजे तक पाठशाला लगेगी।
10 भाषाओं में संस्कृत भी शामिल-विश्व की प्राचीन भाषाओं में लैटिन, आर्मेनियाई, कोरियन, हिब्रू, चीनी, ग्रीक, इजिप्टीरियन के साथ संस्कृत भी शामिल है। संस्कृत सम्भाषण पाठशाला सुबह 8 से दोपहर 12 बजे और दोपहर 3 से 6 बजे तक लगेंगी।
इनका कहना है कि
संस्कृत को जिंदा रखने के लिए देश भर के साथ महाकौशल प्रांत के सभी जिलों में खास पाठशालाएं चलाई जाएंगी।
डॉ. जागेश्वर पटले, प्रांत संठगन मंत्री, संस्कृत भारती