
ईरान में फंसे भारतीय छात्र
Iran Crisis: ईरान में जारी आंतरिक अशांति और बिगड़ते हालातों के बीच वहां पढ़ रहे भारतीय छात्र एक गंभीर संकट में फंस गए हैं। हालत इतनी चिंताजनक हो गई है कि इन छात्रों के पास न तो घर लौटने के लिए पासपोर्ट है और न ही फ्लाइट के टिकट खरीदने के लिए पैसे हैं। ईरान में मौजूदा तनाव का सबसे ज्यादा असर वहां पढ़ रहे विदेशी छात्रों पर पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, अकेले तेहरान की शहीद बहिश्ती यूनिवर्सिटी में लगभग 70 से 80 भारतीय छात्र फंसे हुए हैं। इनमें से कई छात्र हैदराबाद के रहने वाले हैं। पूरे ईरान की बात करें तो यह संख्या सैकड़ों में हो सकती है।
वहां फंसे छात्रों के सामने तीन पहाड़ जैसी चुनौतियां खड़ी हैं:
1 पासपोर्ट की जब्ती: सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने भारतीय छात्रों के पासपोर्ट अपने पास रोक रखे हैं। बिना पासपोर्ट के छात्र न तो टिकट बुक करा पा रहे हैं और न ही देश छोड़ सकते हैं।
2 आर्थिक तंगी: ईरान में पढ़ रहे कई छात्र मध्यमवर्गीय या गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। मौजूदा संकट के कारण उड़ानों के दाम आसमान छू रहे हैं, जिन्हें चुका पाना छात्रों और उनके अभिभावकों के बस से बाहर है।
3 डिजिटल ब्लैकआउट: ईरान में इंटरनेट पर कड़े प्रतिबंधों के कारण छात्र अपने माता-पिता से संपर्क नहीं कर पा रहे हैं। भारत में बैठे परिजन अपने बच्चों की सलामती जानने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं।
भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने हाल ही में अपने ईरानी समकक्ष से बातचीत कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया है। हालांकि, छात्रों के परिजनों का कहना है कि फोन पर आश्वासन तो मिल रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अभी तक कोई ठोस निकासी योजना (Rescue Mission) नजर नहीं आ रही है। जब तक पासपोर्ट वापस नहीं मिलते, तब तक छात्र तकनीकी रूप से वहां कैद जैसे हालात में हैं।
इस मानवीय संकट को देखते हुए एआईएमआईएम (AIMIM) प्रमुख व हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और उनकी सुरक्षित निकासी (Evacuation Plan) की मांग की है। ओवैसी ने केंद्र सरकार को घेरा है। ओवैसी ने कहा कि उन्हें कई परेशान माता-पिता के फोन आए हैं जो अपने बच्चों के भविष्य और जान को लेकर डरे हुए हैं।
ओवैसी ने सरकार से अपील करते हुए कहा, "विदेश मंत्री ने बात की है, यह अच्छी बात है, लेकिन अब समय एक्शन का है। छात्रों के पास टिकट के पैसे नहीं हैं और उनके पासपोर्ट यूनिवर्सिटी प्रशासन ने दबा रखे हैं। सरकार को चाहिए कि वह ईरान सरकार पर दबाव बनाए ताकि छात्रों को उनके दस्तावेज वापस मिलें और उनके लिए एयरलिफ्ट की सुविधा सुनिश्चित की जाए।"
बहरहाल, ईरान में फंसे इन छात्रों का शैक्षणिक भविष्य भी अब दांव पर है। अगर छात्र बीच सत्र में भारत लौटते हैं, तो उनकी डिग्री और वहां जमा की गई भारी-भरकम फीस का क्या होगा? क्या भारत सरकार इन मेडिकल और टेक्निकल छात्रों के लिए देश के भीतर किसी वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार करेगी? यह एक ऐसा आर्थिक और करियर संबंधी पहलू है, जिस पर अभी तक चर्चा शुरू नहीं हुई है।
Updated on:
16 Jan 2026 09:32 pm
Published on:
16 Jan 2026 09:27 pm
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