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नर्मदा के ब्रह्म कुंड से प्रकट हुए थे चंद्रमौलेश्वर महादेव, संतान की कामना से होता है अभिषेक

नर्मदा के ब्रह्म कुंड से प्रकट हुए थे चंद्रमौलेश्वर महादेव, संतान की कामना से होता है अभिषेक

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sawan shiv pujan

shiv puja vidhi

नरसिंहपुर। बरमान में नर्मदा नदी के किनारे रेतघाट में स्थित चंद्रमौलेश्वर मंदिर लोगों की आस्था और शिव भक्ति का केंद्र है। मंदिर में विराजे चंद्रमौलेश्वर महादेव को नर्मदेश्वर कहा जाता है। यहां नर्मदेश्वर का आशय है नर्मदा से निकला हुआ शिवलिंग। यहां स्थापित शिवलिंग रानी दुर्गावती के शासन काल में नर्मदा नदी के सूरजकुंड के समीप स्थित ब्रह्मकुंड से प्रकट हुआ था।

बरमान में रेतघाट पर स्थित है भव्य मंदिर

नर्मदा नदी के तट पर स्थित होने के कारण इस मंदिर का शिवभक्तों के लिए विशेष महत्व है। यहां बड़ी संख्या में दूर दराज से शिवभक्त पहुंचते हैं जो भक्तिभाव से मां नर्मदा में स्नान उपरांत चंद्रमौलेश्वर महादेव का नर्मदा जल से अभिषेक करते हैं। नर्मदेश्वर भोलेनाथ के बारे में मान्यता है कि यहां प्रार्थना करने पर भक्तों के दुख दूर होते हैं और उन्हें उत्तम संतति की प्राप्ति होती है। लोग यहां संतान की कामना से अभिषेक व पूजन अर्चन के लिए आते हैं।

महिला को स्वप्न में दिया संकेत- आचार्य पं. राकेश शर्मा ने बताया कि यहां रानी दुर्गावती के काल में पिसनहारी नाम की एक महिला को भगवान शिव ने स्वप्न में दर्शन देकर संकेत दिया कि ब्रह्मकुंड से शिवलिंग निकाल कर प्राण प्रतिष्ठा कराए। महिला ने ब्रह्मकुंड में शिवलिंग की तलाश की। जिसके बाद उसे कुंड में दो शिवलिंग मिले जिसमें से एक बहुत ज्यादा भारी होने के कारण उसे निकाला नहीं जा सका। एक कम वजनी होने से उसे बाहर निकाल कर उसकी विधिवत प्राण प्रतिष्ठा कराई गई। पिसनहारी ने ही मंदिर का निर्माण कराया। शिवरात्रि, श्रावण सोमवार और अन्य त्योहारों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन व पूजन अर्चन कराने आते हैं। अमावस्या और पूर्णिमा पर विशेष अनुष्ठान कराए जाते हैं।