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ये है 800 ई.पू का पौधा, इसकी खुशबू से दूर भागते हैं ‘सांप’

इस पौधे में अदभुत शक्ति है। लेकिन जानकारी के अभाव में लोग इसका लाभ नहीं ले पाते हैं। 

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जबलपुर। बारिश का मौसम है और जहरीले सांपों का गली मोहल्ले से ही नही घरों से भी निकलना शुरू हो गया। कई बार ये तेज बहाव में भी बहकर आ जाते हैं और कई बार अपनी जान बचाने के लिए घरों के अंदर शरण लेते हैं। ऐसे में ये नुकसानदायी साबित हो सकते हैं। थोड़ी सी भी असावधानी आपकी जान को मुसीबत में डाल सकती है। बारिश में सर्प घर और आपके आसपास से दूर रहें इसलिए एक पौधे का उपयोग किया जा सकता है। इसका जितना औषधिय महत्व है उतना ही जहरीले कीड़ों को घर से दूर रखने में सहयोगी साबित होता है।
इस पौधे का वर्णन चरक(1000-800 ई.पू.) ने संस्कृत नाम सर्पगंधा के तहत सर्पदंश तथा कीटदंश के उपचार हेतु लाभप्रद विषनाशक के रुप में किया है। सर्पगंधा से जुड़ी अनेक कथायें हैं। यह सर्प के काटने पर दवा के नाम पर प्रयोग में आता है। सर्प काटने के अलावा इसे बिच्छू काटने के स्थान पर भी लगाने से राहत मिलती है।
ये पौधा अब लुप्त होने के कगार पर है। इसके अन्य नाम हैं घवल बरूआ, चंद्रभागा, छोटा चांद। जबकि इसका वैज्ञानिक नाम सवोल्फिया सर्पेतिना है। इस पौधे में अदभुत शक्ति है। लेकिन जानकारी के अभाव में लोग इसका लाभ नहीं ले पाते हैं। कहा जाता है कि जिस घर के अहाते में सर्पगंधा का पौधा लगा हो, वहां विषैले जीव-जंतु प्रवेश नहीं करते। ये पौधा विषैले जीवों का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है। इसके प्रभाव से सांप, बिच्छू दूर भागते हैं।