
Sauravya story of Rani Durgavati
जबलपुर । रानी दुर्गावती की शौर्य गाथा आज भी हर जुबान पर है। अकबर की सेना से डटकर मुकाबला करने वाली रानी दुर्गावती की गौरवगाथा भंवरताल गार्डन में स्थापित रानी दुर्गावती की हाथी पर सवार प्रतिमा के नीचे खुदी हुई हैं। प्रतिमा की स्थापना पर कई लोगों द्वारा दुर्गावती के जीवन पर कविताओं का लेखन किया गया था, जिसके कुछ हिस्से यहां की शिलाओं पर हैं। इन कविताओं में जहां शहर के प्रबुद्धजनों और साहित्यकारों की रचनाओं को शामिल किया गया है, वहीं एक अज्ञात ब्रिटिश अफसर की कविता को भी प्रमुखता से लिखवाया गया है। रानी की वीरता की मिसाल ब्रिटिश अधिकारी भी देते थे। जब रानी ब्रिटिश सेना के सामने अपने सैनिकों के साथ लड़ती थी तो ब्रिटिश सेना कांपने लगती थी।
महिलाओं की मददगार बनेगी ये सखी..
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मर्दानी थी ये रानी मुगलों को खदेड़कर इस जगह पर पाई थी वीरगति
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याद किया वीरांगना का शौर्य, शहर ने मिलकर दी श्रद्धांजलि, देखें वीडियो
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शिलालेख पर खुदी कविताएं
राजपूताना खून की बहादुर बेटी। जिसमें गौरव गान की आवाज में तहकला मचा लिया। गौंडों का साम्राज्य खत्म हो गया, जहां अजनबियों से शासन करने की योजना बनाई इसके बाद ही दुर्गावती के कारण अपना शौर्य नहीं दिखा पाए।
अज्ञात
इतने ही में अंत देखकर अपना आता, रानी ने की विनय बचाओ धर्म विधाता। और कटानी छीन महावत के दृढ़ कर से, कर डाला निज अंत धर्म जाने के डर से
कामता प्रसाद गुरु
वज कवच तनु कंध धनु कर कृपान कटि ढाल गढ़ मंडल दुर्गावती रण दुर्गा विकराल, मत मुगल दल दुलमल्यौ गद मंडलग्ण ठानि, धनि दुर्गा, दुर्गावती। राखो तुहि कुल काति
वियोग हरि
धरती की लाज बचावण नैं, दलपत रीआण निभावन नै, अंकुश सीने में मार लियो, पशुतारों शीश झुकावण नै।
मेघराज मुकुल
Published on:
23 Jun 2018 06:23 pm
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