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2023 में 58 दिन का होगा सावन का महीना, पर्वों की तिथियों में 15-20 दिन का रहेगा अंतर

2023 में 58 दिन का होगा सावन का महीना, पर्वों की तिथियों में 15-20 दिन का रहेगा अंतर  

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sawan month 2023

sawan month 2023

जबलपुर. सामान्यत: साल का हर महीना तीस दिन का होता है। इस बार विक्रम संवत 2080 में श्रावण या सावन के दो महीने होंगे। इस बार सावन महीना कुल 58 दिन का रहेगा। साल 2023 में सावन के महीने में पुरुषोत्तम मास पड़ रहा है। इसका शास्त्रों में काफी महत्व है। इसकी वजह से कई हिन्दू त्योहारों की तिथियों में 15-20 दिन का अंतर आएगा।

साल में घटते हैं 11 दिन

ज्योतिषाचार्य जनार्दन शुक्ला के अनुसार कई बार दो तिथि एक ही दिन होती है और कई बार एक तिथि दो दिन पड़ती है। तिथियों की इस घट बढ़ के चलते एक साल में लगभग 11 दिन घट जाते हैं, यानी हिन्दू संवत्सर का साल 354 दिन का होता है। इस तरह तीन साल में 30 से 33 दिन का अंतर आ जाता है। इस अंतर को पूरा करने के लिए हर तीसरे साल में हिन्दू संवत्सर का कोई न कोई महीना दो बार पड़ता है। नए साल में सावन महीना दो बार पड़ेगा।

ज्योतिर्विद शुक्ला ने बताया कि श्रावण माह दो बार पड़ने से कई पर्व सामान्य रूप से मनाए जाने वाली तिथियों से 15 से 20 दिन आगे, पीछे मनाए जाएंगे। इस साल 2022 की तुलना में अगले साल 2023 में कुछ पर्व पहले और कुछ बाद में पड़ेंगे। सावन महीने के पहले पड़ने वाले त्योहार लगभग 15 दिन पहले आएंगे। सावन के बाद के पर्व 15 से 20 दिन बाद पड़ेंगे।

चार जुलाई से 31 अगस्त तक रहेगा सावन

नए साल में सावन माह की शुरूआत 4 जुलाई से होगी और 31 अगस्त तक सावन महीना चलेगा। सावन का पहला कृष्ण पक्ष 18 जुलाई को समाप्त होगा। इसके बाद 18 जुलाई से 16 अगस्त तक पुरुषोत्तम मास होगा। 16 अगस्त से 31 अगस्त तक श्रावण मास का शुक्ल पक्ष होगा।

पुरुषोत्तम मास

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सावन के महीने में भगवान शंकर की पूजा और पुरुषोत्तम मास में भगवान विष्णु की पूजा का महत्व है। सावन के महीने के बीच में ही पुरुषोत्तम माह मनाया जाएगा। इसलिए इस बार भगवान शंकर और भगवान विष्णु की पूजा श्रावण मास के दौरान साथ साथ की जाएगी। हर साल चातुर्मास चार माह का होता है, लेकिन आने वाले साल में सावन माह दो बार होने से चातुर्मास पांच माह का होगा। 29 जून 2023 को देवशयनी एकादशी से चातुर्मास की शुरुआत होगी। 23 नवंबर 2023 को देवउठनी एकादशी पर चातुर्मास का समापन होगा।