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जबलपुर। घर से लेकर प्रदेश सरकार तक बच्चों को बेहतर से बेहतर शिक्षा देने के लिए और अरबों का फंड जारी कर रही है। उसके बावजूद शिक्षा का स्तर सुधारने के बजाए गिरता चला जा रहा है। इसमें वह लोग जिम्मेदार हैं जो पानी फेर रहे जिन्हें जिम्मेदारी दी गई है। बच्चों को पढ़ाने कि वह अपने काम से मुंह मोड़ लेते हुए नजर आते हैं। यही नहीं बच्चों से काम कराए जाते हैं जो भी घर में भी उनके मां बाप नहीं करवाते। कुछ ऐसा ही खुलासा करती हुई पत्रिका कि यह विशेष रिपोर्ट।
ग्रामीण क्षेत्र के शासकीय स्कूलों के छात्र-छात्राएं पढ़ाई में कम मध्याह्न भोजन की थाली धोने में ज्यादा व्यस्त रहते हैं। उनसे हैंडपम्पों से पीने का सार्वजनिक पानी भी भरवाया जाता है। यह स्थिति है मझौली विकासखंड की प्राथमिक शाला नंदग्राम और प्राथमिक-माध्यमिक शाला रानीताल की। नंदग्राम प्राथमिक स्कूल में दोपहर करीब 1.30 बजे एक दर्जन से अधिक छात्र-छात्राएं मध्याह्न भोजन के बाद स्कूल से कुछ दूरी पर लगे हैंडपम्प पर बर्तन धोते मिले।
स्कूल में 98 विद्यार्थी हैं। बर्तन धो रहे विद्यार्थियों ने बताया कि मिड-डे-मील वितरण करने वाला समूह थाली नहीं धोता। उन्होंने बताया कि स्कूल में गिलास भी नहीं है। इसलिए थाली धोकर उसी से पानी भी पीते हैं। करीब आधे घंटे तक छात्र थाली धोने में लगे रहे। ऐसी ही स्थिति प्राथमिक ओर माध्यमिक शाला रानीताल में मिली। यहां भी छात्र-छात्राएं हैंडपंप पर बर्तन धोते मिले।
हैंडपम्प से ढोते हैं पानी
रानीताल हाईस्कूल में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं होने से छात्रों से सार्वजनिक हैंडपम्प से प्लास्टिक के गुम्मों में पानी भरवाया जाता है। इस पानी का उपयोग मध्याह्न भोजन और स्कूल में पीने के लिए होता है।
मझौली विकासखंड में 226 प्राथमिक और 78 माध्यमिक स्कूल हैं। मझौली नगर में मध्याह्न भोजन की स्थिति काफी हद तक ठीक है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के हर प्राथमिक-माध्यमिक स्कूल में छात्र-छात्राओं को मध्याह्न भोजन की थाली धोना पड़ता है। स्कूलों में लगे हैंडपंप खराब होने से छात्रों से ही पीने का पानी भरवाया जाता है।
शासकीय स्कूलों में छात्रों से मध्याह्न भोजन के बर्तन नहीं धुलवाए जा सकते। यदि कहीं ऐसा हो रहा है तो प्रधान अध्यापक से जानकारी लेकर सम्बंधित स्व-सहायता समूह के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- विनोद पटेल, बीआरसी, मझौली
Published on:
18 Oct 2017 01:33 pm
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