
School of Wildlife become National Institute
जबलपुर. वेटरनरी विवि (वीयू) के स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक को नेशनल इंस्टीट्यूट बनाने की कवायद की जा रही है। यह संस्थान अपनी तरह का सेंट्रल इंडिया में इकलौता संस्थान है। शासन और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ चर्चा चल रही है। इस मामले में सकारात्मक रुख दिखाए जाने के बाद वीयू की ओर से विशेषज्ञों के पैनल के माध्यम से प्रस्ताव तैयार करवाया जा रहा है जिसे शासन को भेजा जाएगा। वन्य प्राणियों की सेहत और स्वास्थ्य से जुड़े इस संस्थान को राष्ट्रीय संस्थान का दर्जा मिल जाता है तो कई प्रोजेक्ट और अनुसंधान कार्यों का संचालन सीधे वीयू से किया जाएगा।
वेस्टीबुलोटॉमी सर्जरी से मिली ख्याति
भारत की पहली 'वेजाइनल वेस्टीबुलोटॉमीÓ सर्जरी का श्रेय इसी संस्थान को जाता है। दुनिया की 21वीं सर्जरी इस संस्थान के चिकित्सकों द्वारा की गई थी। जिसमें एक मादा हथिनी का मरा हुआ बच्चा निकालकर हथिनी के प्राणों की रक्षा की गई। संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से विभिन्न टाइगर रिजर्व में स्वास्थ्य प्रबंधन के क्षेत्र में सेवाएं दी जा रही हैं। वन्य प्राणियों के फारेन्सिक परीक्षण संस्थान के चिकित्सकों द्वारा किया जा रहा है। वाइल्ड लाइफ का दायरा काफी बड़ा है। वीयू का स्टाफ और विशेषज्ञ की टीम भी कई बार अमले की कमी से जूझने लगती है। ऐसे में पीएचडी और मास्टर स्टूडेंट की बनी स्पेशल टीम भी उनकी मदद के लिए आगे आती है।
यह है स्थिति
पांच राज्यों को दे रहा सेवाएं
प्रदेश का इकलौता फॉरेंसिक स्कूल
वन्य प्राणियों के इलाज की दी जाती है ट्रेनिंग
राष्ट्रीय स्तर पर मिल चुकी है सराहना
कई वन्य प्राणियों को बचाय
यह होगा लाभ
बढेंगे आधुनिक संसाधन
नई टैक्नोलॉजी ट्रांसफर होगी
स्टूडेंट ट्रेनिंग प्रोगाम शुरू होंगे
फाूरेसिंक हैल्थ में मदद मिलेगी
फैकेल्टी का आदान प्रदान होगा
कई राज्यों को प्रदान कर रहा सेवाएं
यह संस्थान देश के कई राज्यों को अपनी सेवाएं प्रदान कर रहा है। इसमें मध्य प्रदेश के अलावा छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गोवा एवं झारखंड शामिल हैं। चिकित्सकों को वन्य प्राणियों से जुड़ी चिकित्सीय ट्रेनिंग दी जाती है तो वहीं यहां की टीम कई बार मिशन में जाती है।
वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक स्कूल को नेशनल इंस्टीट्यूट बनाने के लिए उच्चस्तर पर चर्चा की जा रही है। हम प्रस्ताव तैयार करवा रहे हैं। हमारे विशेषज्ञ कई राज्यों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
डॉ. पीडी जुयाल, कुलपति, वीयू
Published on:
27 Apr 2018 06:30 am
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