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जीवन में क्या प्रभाव डालते हैं नवग्रह, यहां पढ़ें शांति मंत्र और उपाय…

यहां हम आपको एक-एक करके सभी नौ ग्रहों की शांति हेतु मंत्र प्रदान करने जा रहे हैं। 

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Abha Sen

Mar 11, 2016

navagraha

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जबलपुर। यहां हम आपको एक-एक करके सभी नौ ग्रहों की शांति हेतु मंत्र प्रदान करने जा रहे हैं। यह सभी ग्रह हमारे जीवन पर खास असर करते हैं, उदाहरण के लिए यदि सूर्य ग्रह की बात करें तो यह हमें समाज में सम्मान एवं यश प्राप्त कराता है।

सूर्य ग्रह
जिस जातक की कुण्डली में सूर्य सही स्थिति में बैठा हो, ऐसा जातक हमेशा रोगमुक्त रहता है। कभी कोई बड़ी बीमारी ऐसे जातक को छू भी नहीं सकती। लेकिन यदि किसी जातक की कुण्डली में सूर्य की स्थिति सही ना हो तो उसे सूर्य देव के मंत्र का जाप करना चाहिए।

शांति मंत्र
सूर्य ग्रह की शांति हेतु बीज मंत्र है - ऊॅं हृीं घृणिः सूर्याय नमः। जप मंत्र - ऊॅं सूं सूर्याय नमः। तांत्रिक मंत्र - ऊॅं हृां हृीं हृौं सः सूर्याय नमः। ध्यान मंत्र - द्विभुजं पहस्तं च वरदं मुकुटान्वितम्। पीड़ाहरण मंत्र - ग्रहणामादिरा दित्यो लोकरक्षण कारकः। सूर्य गायत्री – ॐ आदित्याय विद्महे भास्कराय धीमहि तन्नो सूर्यः प्रचोदयात्। सूर्य गायत्री मंत्र की जप संख्या 7000 होनी चाहिए।



चंद्र ग्रह
यदि किसी जातक की कुण्डली में चंद्र ग्रह कमजोर हो, तो यह उसकी मानसिक स्थिति को खराब करता है। चंद्रमा का सीधा संबंध जातक की मानसिक हालत से होता है, जिसके बिगड़ने से वह अपना मानसिक आपा भी खो सकता है। यदि चंद्रमा सही स्थिति में हो तो जातक को यश की प्राप्ति होती है।

शांति मंत्र
चंद्र ग्रह की शांति हेतु बीज मंत्र - ऊॅं श्रीं कीं चं चन्द्राय नमः। जप मंत्र - ऊॅं सों सोमाय नमः। तांत्रिक मंत्र - ऊॅं श्रां श्रीं श्रौं चन्द्रमसे नमः। ध्यान मंत्र - गदायुधधरं देवं श्वेतवर्ण निशाकरम्। ध्यायेत् अमृतसंभूतं सर्वकामफलप्रदम्। चन्द्र गायत्री – ॐ अमृताड्गांय विहे कलारूपाय धीमहि तन्नो सोमः प्रचोदयात्। चंद्र गायत्री मंत्र की जप संख्या 11000 है।

मंगल ग्रह
ज्योतिष में मंगल ग्रह को विनाशकारी माना गया है। यह जिस भी जातक की कुण्डली में नीच स्थिति या फिर गलत भाव में बैठ जाए, तो उसकी जिंदगी तबाह कर सकता है। ज्योतिषीयों के अनुसार मंगल ग्रह के दर्शन-पूजन-दान व जाप से पराक्रम प्राप्त होता है एवं मांगलिक दोष शांत होता है।

शांति मंत्र
मंगल ग्रह की शांति हेतु बीज मंत्र - ॐ हृं श्रीं भौमाय नमः। जप मंत्र – ॐ भौं भौमाय नमः। तांत्रिक मंत्र – ॐ क्रां क्रीं क्रौं सं: भौमाय नमः। ध्यान मंत्र - रक्तमाल्याम्बरधरं हेमरूपं चतुर्भुजम्। शक्तिशूलगदापन् धरन्तं स्वकारां बुजैः। मंगल ग्रह का गायत्री मंत्र – ॐ अंगारकाय विहे शक्तिहस्ताय धीमहि तन्नो भौमः प्रचोदयात्। इसकी जप संख्या 10000 है।

बुध ग्रह
बुध ग्रह ज्योतिषीय दृष्टि से कम्युनिकेशन, नेटवर्किंग, विचार चर्चा एवं अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। ज्योतिष अध्ययनों की मानें तो बुध ग्रह के दर्शन-पूजन-दान व जाप से व्यापार में वृद्धि होती है। यदि आप बुध ग्रह के आगे बताए जा रहे मंत्रों का जप कफ्रेंगे, तो आपको सफलता अवश्य प्राप्त होगी।

शांति मंत्र
बुध ग्रह की शांति हेतु बीज मंत्र – ॐ ऐं स्त्रीं श्रीं बुधाय नमः। जप मंत्र - ॐ बुं बुधाय नमः। तांत्रिक मंत्र – ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः। ध्यान मंत्र - सिंहारूढं चतुबाहुं खड्गंचर्मगदाधरम्। सोमपुत्रं महासौम्यं ध्यायेत सर्वार्थासिद्धिम। बुध गायत्री - ॐ सौम्यरूपाय विहे वाणेशाय धीमहि तन्नो बुधः प्रचोदयात्। बुध गायत्री मंत्र की जप संख्या 4000 है।

गुरु ग्रह
गुरु ग्रह मनुष्य के ज्ञान को नियंत्रित करता है। जिसकी जन्म पत्रिका में गुरु की स्थिति अच्छी हो, वह जातक यकीनन बुद्धिमान एवं प्रतापी होगा। गुरू ग्रह के दर्शन पूजन दान व जाप से ज्योतिष व ज्ञान प्राप्त होता है। शांति मंत्र

गुरु ग्रह की शांति हेतु बीज मंत्र - ॐ हृीं क्लीं हृूं बृहस्पतये नमः। जप मंत्र – ॐ बृं बृहस्पतये नमः। तांत्रिक मंत्र – ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरूवे नमः। ध्यान मंत्र - दण्डाक्षमाला वरद कमण्डलुधरं विभूम्। पुष्परागांकितं पीतं वरदं भावयेद् गुरूम्। गुरू गायत्री – ॐ गुरूरूपाय विहे दिव्यदेहाय धीमहि तन्नो गुरू प्रचोदयात्। इसकी जप संख्या 19000 है।

शुक्र ग्रह
शुक्र ग्रह सौंदर्य, रोमांस, प्रेम, एवं अन्य स्वाभाविक तत्वों का प्रतिनिधित्व करता है। कुण्डली में शुक्र ग्रह को मजबूत करने से सुंदरता प्राप्त होती है। ऐसा जातक अपने साथी के प्रति प्यार में बेहद रोमांटिक होता है। ज्योतिष अध्ययनों के अनुसार शुक्र ग्रह के दर्शन-पूजन-दान व जाप से सौंन्दर्य में वृद्धि होती है।

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शांति मंत्र

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यदि किसी जातक की कुण्डली में शुक्र ग्रह बुरी दशा में हो, तो उसकी शांति हेतु उन मंत्रों का जप करें। बीज मंत्र – ॐ हृीं श्रीं शुक्राये नमः। जप मंत्र – ॐ शुं शुक्राये नमः। तांत्रिक मंत्र – ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राये नमः। ध्यान मंत्र - जटिल चाक्षसूत्रं च वरदण्डकमण्डलुम। श्वेतवस्त्रावृतं शुक्रं ध्यायेत् दानवपूजितम्। शुक्र गायत्री - ॐ भार्गवाय विहे शुक्लांबराय धीमहि तन्नो शुक्रः प्रचोदयात्। इस मंत्र की जप संख्या 10000 है।

शनि ग्रह
शनि ग्रह एक ऐसा ग्रह है जिसकी क्रूर दृष्टि यदि किसी जातक पर हो, तो उसकी दुनिया तहस-नहस हो जाती है। क्या आप जानते हैं कि शनि का प्रभाव यदि किसी जातक के पहले भाव पर पड़ रहा हो, तो यह उसकी मौत का कारण भी बन सकता है।

शांति मंत्र
शनि की साढ़ेसाती एवं ढैय्या में लोग शनि ग्रह की शांति एवं पूजन का सहारा लेते हैं। ताकि इसका प्रभाव कम हो सके। बीज मंत्र – ॐ ऐं हृीं श्रीं शनैश्चराय नमः। जप मंत्र - ॐ शं शनैश्चराय नमः। तांत्रिक मंत्र – ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः। ध्यान मंत्र - नीलांबरो नीलवपुः किरीटी गृध्रस्थितस्त्रास करो धनुष्मान्। चतुर्भुजस्सूर्यसुतः प्रशान्त सदाऽस्तु मह्यं वरदः प्रसन्नः। शनि गायत्री – ॐ सूर्यपुत्राय विहे नीलांजनाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोदयात्। शनि गायत्री मंत्र की जप संख्या 23000 है।

राहू ग्रह
राहू ग्रह ज्योतिष की दृष्टि से पापी ग्रह माना जाता है। यह शनि ग्रह से भी बुरा असर करता है। यह सबसे पहले जातक की मानसिक हालत को खराब करता है। इसलिए यदि किसी जातक की कुण्डली में राहू की महादशा चल रही हो, तो उसे जल्द से जल्द राहू ग्रह की शांति के उपाय कर लेने चाहिए।

शांति मंत्र
राहू ग्रह की शांति हेतु मंत्र इस प्रकार हैं। बीज मंत्र – ॐ ऐं हृीं राहवे नमः। जप मंत्र – ॐ रां राहवे नमः। तांत्रिक मंत्र – ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः। ध्यान मंत्र - करालवदनं खड्गचर्म शूलवरान्वितम्। नीलसिंहासनस्थं च ध्यायेत राहुं प्रशान्तये। राहू गायत्री – ॐ शिरोरूपाय विहे अमृतेशाय धीमहि तन्नो राहू प्रचोदयात्। जप संख्या 18000

केतू ग्रह
केतू ग्रह के दर्शन पूजन दान व जाप से मोक्ष की प्राप्ति होती है। यदि किसी जातक की कुण्डली में केतू की स्थिति खराब हो तो उसके लिए इन मंत्रों का जप करें... बीज मंत्र – ॐ हृीं केतवे नमः। जप मंत्र – ॐ कें केतवे नमः। तांत्रिक मंत्र – ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः। ध्यान मंत्र - धम्रवर्ण द्विबाहुं च केतुं च विक्रताननाः। गृध्रासनगतं नित्यं ध्यायेत् सर्व फलाप्तये। केतु गायत्री – ॐ पपुत्राय विहे धुम्रवर्णाय धीमहि तन्नो केतु प्रचोदयात्। जप संख्या 17000।

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