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टीएसएम से सीमांकन में करना होग़ा महीनों का इंतजार

जिले की हर तहसील में एक-एक ही मशीन, जरीब से चल रहा काम    

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There is a shortage of electronic total station machine which helps in reducing the imperfections of land or house. There are only ten machines in 10 tehsils

जबलपुर. जमीन या मकान की नापजोख की खामियों को कम करने में सहायक इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन मशीन की कमी जिले में बनी हुई है। 10 तहसीलों में सिर्फ दस मशीन हैं। एक अतिरिक्त मशीन भू-अभिलेख अधीक्षक कार्यालय में है। ऐसे में आगामी समय में मशीन के जरिए सीमांकन करना कठिन होगा। यही कारण है कि इसे अनिवार्य करने के नियम को उदार करते हुए जरीब (सांकल) से भी नापजोख की अनुमति मिली है। यह ऐसी मशीन हैं जिसमें एक-एक सेंटीमीटर की नाप भी आसान है। खुले एरिया में 3 से 4 घंटे में 50 एकड़ से ज्यादा जमीन की नापजोख कर उसका नक्शा भी दे देती है।


जिले में 10 तहसील हैं। बीच में बिना अनुमति निजी एजेंसियों के द्वारा सीमांकन किया जा रहा था तो इस पर रोक लगा दी गई थी। निजी एजेंसी अपनी मशीन का उपयोग कर रही थी। नियम है कि पटवारी इसका नापजोख करें। इसमें सरकारी इलेक्ट्रॉनिक टोटल स्टेशन मशीन (TSM) का उपयोग किया जाना था। जब विवाद बढ़ा तो फिर इन मशीनों को निकाला गया। पटवारियों को इसका प्रशिक्षण दिया गया। इसलिए अब सीमांकन इन्हीं से किया जाना है। कई बार जरीब से एक कोण की गड़बड़ी हुई तो पूरे क्षेत्रफल का नापजोख बिगडऩे की आशंका रहती है।

जिले में 17 आरआई सर्किल
जिले में अभी करीब 17 राजस्व निरीक्षक मंडल (आरआई सर्किल) हैं। इनमें चार नई तहसील शामिल नहीं हैं। इन्हें शामिल किया जाएगा तो संख्या बढ़ जाएगी। इस हिसाब से मशीनें जिले में नहीं हैं। काम को सरल करने के लिए प्रत्येक तहसील में कम से कम तीन टोटल स्टेशन मशीन होनी चाहिए ताकि सीमांकन आसानी से हो सके। जानकारों ने बताया कि हर तहसील में प्रत्येक माह 100 से 150 प्रकरण सीमांकन के आते हैं। ऐसे में एक मशीन से यह काम पूरा करना मुश्किल हो सकता है।

कई खूबियां है मशीन में

इस मशीन की खासियत ये है कि परिणाम सांकल की नापजोख से ज्यादा शुद्ध होते हैं। इसके जरिए पूरे 360 डिग्री पर नापजोख कर सकते हैं जबकि जरीब से 90 डिग्री तक। सीमांकन के काम में लंबी दूरी की नापजोख भी आसान होती हे। यही नहीं यदि 150 मीटर दूरी तक यदि कोई पेड़, नाला, नदी या दूसरी रुकावट आती है तो भी उससे नाप पूरा हो जाता है। गांव से ज्यादा शहरी क्षेत्रों में सीमांकन कठिन होता है। ऐसे में मशीन के परिणामों पर ही लोग ज्यादा विश्वास करते हैं। बताया जाता है कि मशीन का प्रशिक्षण मास्टर टे्रनर ने हैदराबाद में लिया है। हालांकि उनकी पदस्थापना ग्रामीण क्षेत्रों में कर दी गई है।

जिले की जरूरत के हिसाब से मशीन कम है लेकिन शासन इन्हें उपलब्ध करवाएगा। आरआई सर्किल के आधार पर मशीन का आवंटन प्रस्तावित है। अभी जरीब से भी सीमांकन किया जा सकता है। इसलिए ज्यादा परेशानी नहीं है।

डॉ. ललित ग्वालवंशी, अधीक्षक लैंड रिकॉर्ड