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siddha ganesh mandir : प्रजापालक हैं गढ़ा के कल्चुरी कालीन गणेश

प्रजापालक हैं गढ़ा के कल्चुरी कालीन गणेश

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siddh ganesh mandir

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जबलपुर। शहर में गोंड व कल्चुरी शासकों द्वारा वैसे तो बहुत से मठ, मंदिर व धार्मिक स्थल बनाए गए थे, जो आज भी गौरवशाली अतीत की कहानियां कहते हुए शान से खड़े हैं। सबसे बड़ी बात ये है कि हर मंदिर, मूर्ति की अपनी एक शैली, कहानी और मान्यता है। इन्हीं में से एक गणेश मंदिर बघाताल मार्ग गढ़ा बाजार में स्थापित है। जिन्हें प्रजापालक के रूप में जाना जाता है। ये कल्चुरी कालीन प्रतिमा धार्मिक दृष्टि से आस्था का केन्द्र है, वहीं स्थापत्य कला के तौर पर यह अद्भुत कलाकारी प्रस्तुत करती है। भगवान की सेवा पूजा पिछली छह पीढिय़ों से सतीश कश्यप के परिवार द्वारा की जा रही है। उन्हीं की देखरेख में पूरा मंदिर है।

सतीश कश्यप के अनुसार प्रजापालक गणेश की स्थापना की सही जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन इतिहासकारों बताया है कि मूर्ति की बनावट से कल्चुरी काल के आसपास स्थापना होना प्रतीत होता है। इनकी स्थापना जंगली जानवरों के भय, संक्रामक बीमारियों रक्षा और प्रजा में खुशहाली के उद्देश्य से तत्कालीन राजाओं के द्वारा यहां मंदिर बनाकर प्रजापालक गणेश की स्थापना की गई थी।

प्रतिमा के समक्ष एक सिद्ध यंत्र भी स्थापित है। जिसकी मान्यता है कि नियमित पूजा करने से कार्य सिद्धि और मनोकामनापूर्ति होती है। इस यंत्र को प्रजा में सुरक्षा का भाव पैदा करने के लिए किया गया था। हर महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को यहां विशेष पूजन होता है।

पिछले 6 पीढ़ी से हमारा परिवार गणेश मंदिर की सेवा में लगा हुआ है जिसमें मेरे पिताजी श्री सतीश कश्यप का विषेस योगदान रहता है हर बुधवार को विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है पिताजी के मार्गदर्शन में हम लोग भी गणेशजी भगवान की सेवा में लगे है