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जबलपुर

रिसर्च: सेम गोत्र में शादी करने से ट्रांसफर होती है गंभीर बीमारियां, पैदा होते हैं बीमार बच्चे

side effects of same gotra marriage: शादी के बाद साझा जीवनशैली पति-पत्नी की सेहत प्रभावित करती है। सर्वे में प्रदेश में सात फीसदी ऐसे परिवार मिले, जिनमें पति-पत्नी दोनों हायपरटेंशन के शिकार थे।

जबलपुरJun 17, 2024 / 02:22 pm

Ashtha Awasthi

side effects of same gotra marriage

side effects of same gotra marriage

side effects of same gotra marriage: भारतीय समाज में विवाह सबसे बड़ा उत्सव है। सात फेरों से शुरू होने वाले दाम्पत्य जीवन को सात जन्मों के बंधन की संज्ञा दी जाती है। लेकिन जोड़ों के साथ बीमारियों के भी सात फेरे होते हैं। यह चौंकाने वाला खुलासा एक रिसर्च में हुआ है। अगर पत्नी को भी हायपरटेंशन (उच्च रक्तचाप) है तो 32% पतियों के इससे प्रभावित होने की आशंका है। इसी तरह पति के पीड़ित होने पर पत्नियों को भी इतने ही प्रतिशत प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, सिकिलसेल और थैलीसीमिया पीड़ित दम्पती में पहले से मौजूद रोगाणु आने वाली संतान की बीमारी का कारण बनते हैं।
यह रिसर्च राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के आंकड़ों के अध्ययन से तैयार की गई है। इसमें स्पष्ट हुआ कि शादी के बाद साझा जीवनशैली पति-पत्नी की सेहत प्रभावित करती है। सर्वे में प्रदेश में सात फीसदी ऐसे परिवार मिले, जिनमें पति-पत्नी दोनों हायपरटेंशन के शिकार थे।
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एक गोत्र में शादी से सिकलसेल और थैलेसीमिया का खतरा ज्यादा

ए क रिसर्च में पाया गया कि दम्पती एक जैसे वातावरण-माहौल में रहते हैं। एक स्थिति का सामना करते हैं। सुख-दु:ख, चिंता साझा करते हैं। एक जैसा खाते हैं तो उनकी बॉडी लैंग्वेज और हाव-भाव भी एक जैसे हो जाते हैं। दोनों का दिमाग एक-दूसरे की अभिव्यक्ति को कॉपी करता है। इससे बीमारियां भी ट्रांसफर होती हैं। शादी के बाद साझा जीवनशैली दंपती में पति-पत्नी दोनों की सेहत प्रभावित करती है। वैज्ञानिकों ने तो ये भी पाया कि कई दंपती के चेहरे पर झुर्रियां भी एक समान ही पड़ने लगती हैं।

तरीका बदलने से सुधार

खा नपान की गुणवत्ता में गिरावट आ रही है। जीवनशैली बदल रही है। इससे सेहत संबंधी कई समस्याएं हो रही हैं। ऊपर से बढ़ता तनाव, यह सब मिलकर भारतीयों को अंदर से घुन की तरह खा रहे हैं। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि परिवारों पर ध्यान केंद्रित करने से भारत में उच्च रक्तचाप की जांच, निदान और उपचार में सुधार हो सकता है। ऐसे कई मामलों को खोजने और इलाज में मदद मिल सकती है, जिनका अब तक पता नहीं चला है। इसकी मदद से उच्च रक्तचाप के निदान न किए गए मामलों में मौजूद बड़े अंतर को कम किया जा सकता है।

हेल्थ कुंडली ही निदान

● सिकलसेल एनीमिया और थैलीसीमिया का संबंध भी सात फेरों से ही है।

● यह हीमोग्लोबिन संबंधी रक्त विकारों का समूह है, जो विरासत में मिलता है।

● लाल रक्त कोशिकाओं में पाए जाने वाले ऑक्सीजन-वाहक प्रोटीन हीमोग्लोबिन में असामान्यता आ जाती है।
● पति-पत्नी इसके वाहक हों तब सिकलसेल होता है।

● अगर एक में ही लक्षण हैं तो परिवार और आने वाली संतान सुरक्षित होते हैं।

● शिशु को यह बीमारी माता-पिता के जीन से मिलती है।
● इसका निदान हेल्थ कुंडली के मिलान से ही संभव है।

● जिन जातियों में गोत्र देखकर शादी नहीं होती, उनकी जांच से सिकलसेल के वाहक का पता लगा सकते हैं। दोनों वाहक हों तो शादी न करें।

बीमारी की जद में मप्र के 20 लाख दंपती

प्रदेश में संख्या के लिहाज से 20 लाख से अधिक दंपती संयुक्त रूप से इस बीमारी की चपेट में हैं। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला कि पहले पति-पत्नी में से एक को ही उच्च रक्तचाप था। बाद में दोनों को हो गया। यह भी पता चला है कि पति-पत्नी दोनों को एक दूसरे की बीमारी का असर होता है और वे कुछ समय बाद उसे साझा करने लगते हैं। अध्ययन के अनुसार, 40 से कम उम्र की महिलाओं में जिनके पति उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं, उनमें भी इसके होने की कहीं अधिक आशंका थी, उनमें यह खतरा 55% अधिक दर्ज किया गया।

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