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एक कलश पानी से भर गया तालाब, गुम हो गए ग्वाल-ग्वालिन 

अनूठा है सिहोरा के गंजताल तालाब का इतिहास, 800 साल पहले गोंड राजा के मंत्री विश्राम सिंह  ने कराया था निर्माण

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Lali Kosta

Jan 17, 2016


अजय खरे/ सत्येंद्र तिवारी @ जबलपुर। गहराई तक खुदाई के बाद भी जब तालाब में पानी नहीं निकला, तो ग्वालन और ग्वाल ने पानी से भरा एक कलश गोड़ राजा के मंत्री को दिया..। जैसे ही कलश का पानी तालाब में डाला गया, वह लबालब हो गया। कुछ ऐसी ही जन श्रुति है सिहोरा के समीप गंजताल गांव के तालाब की...।
ग्वाल और ग्वालिन के बलिदान की गाथा सुनाते इस तालाब के किनारे आ भी मेला भरता है। ग्रामीणों ने बताया कि यह तालाब देव तुल्य है और वह कभी नहीं सूखता। मकर संक्रांति उपलक्ष्य में अब भी यहां मेला लगा हुआ है, जो कई दिन तक चलता है।

गोंड राजा के मंत्री ने बनवाया था तालाब
जन श्रुतियों के अनुसार 800 साल पहले जब यहां गोंड राजाओं की हुकूमत थी उस समय राजा निजाम शाह के एक मंत्री विश्राम सिंह ने गंजताल का निर्माण कराया था। उन्होंने गढ़ा राज्य से प्राप्त 12 साल की लगान वसूली की राशि से तालाब का निर्माण कराया था। बताया जाता है कि काफी गहराई तक खोदने के बाद भी जब उसमें पानी नहीं आया तो वे निराश हो गए। एक रात जब वे गहरी नींद में थे तभी स्वप्न में किसी ने उनसे कहा कि गढ़ा राज्य के ग्वाल और ग्वालिन के जोड़े को यहां बुलाया जाए तभी तालाब में पानी आएगा।
ganj tal sihora

... और गुम हो गए ग्वाल ग्वालिन
विश्राम सिंह ने अपने सिपाहियों को भेजकर ग्वाल-ग्वालिन को गंजताल बुलाया। वे दोनों जैसे ही सूखे तालाब के अंदर पहुंचे तो अचानक तालाब से बड़ी मात्रा में जल राशि प्रवाहित होने लगी। जलराशि इतनी ज्यादा थी कि ग्वाल ग्वालिन उसी में समा गए और देखते ही देखते तालाब लबालब हो गया। बताया गया है कि आज तक कभी यह तालाब सूखा नहीं। तालाब के पास ही महादेव का विशाल मंदिर भी बनवाया गया था जो अब रखरखाव न होने से क्षतिग्रस्त हो रहा है।

मेेले में आते हैं 50 गांव के लोग
इस तालाब पर ग्वाल ग्वालिन की याद में हर साल दो दिन का मेला लगता है जिसमें आसपास के करीब 50 गांव के लोग शामिल होते हैं। ऐसी मान्यता है कि मंदिर में विराजमान शिव पिंडी के दर्शन से लोगों के कष्ट दूर होते हैं। मकर संक्रांति और शिवरात्रि पर बड़ी संख्या में लोग शिवार्चन के लिए यहां आते हैं। गंजताल से लगी करीब 100 एकड़ जमीन है जो गोपाल लाल ट्रस्ट हनुमानताल को दी गई है।

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