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मिडिल ईस्ट युद्ध की मार, एमपी में रोजमर्रा की चीजें बिस्किट, तेल, पानी, दवाइयां आदि महंगी

Middle East War Effect : ईरान के साथ जारी इजराइल और अमेरिका की जंग का सीधा असर बाजार के साथ - साथ आम जीवन पर पड़ने लगा है। पेट्रोलियम आधारित उत्पादों की कीमतों में तेजी आने से रोजमर्रा की चीजें महंगी होती जा रही हैं।
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भोपाल

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Mohammad Faiz Mubarak

•

Updated: 5 Apr 2026, 9:59 AM IST

Middle East War Effect

आम आदमी की जेब पर पड़ने लगी युद्ध की मार (Photo Source- patrika)

Middle East War Effect : बीते एक माह से ज्यादा समय से ईरान के साथ जारी इजराइल और अमेरिका की जंग के दुष्परिणाम अब सीधे तौर पर दुनिया के कई देशों पर पड़ने लगे हैं। ये असर बाजार के साथ - साथ आम जीवन पर भी दिखाई देने लगे हैं। पेट्रोलियम आधारित उत्पादों की कीमतों में तेजी आने से रोजमर्रा की चीजें महंगी होती जा रही हैं। कपड़ों की धुलाई से लेकर पानी की बोतल तक। यहां तक की खाद्य सामग्री से लेकर दवाओं तक, सबकुछ इससे प्रभावित हो रहा है।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के थोक व्यापारियों के अनुसार, रोजाना के इस्तेमाल की कई चीजें पेट्रोकेमिकल उत्पादों से बनाई जाती हैं। युद्ध के चलते इन कच्चे माल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर बाजार में मिलने वाली वस्तुओं की कीमतों पर पड़ रहा है।

विक्रेताओँ के मार्जिन में कटौती

बता दें कि, पानी की बोतलें प्लास्टिक के दानों से बनाई जाती हैं, जिनकी कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है। हालात ये हैं कि, पहले जो प्लास्टिक दाना 100 से 110 रुपए प्रति किलो के बीच बिकता था, अब उसकी बिक्री 200 से 250 रुपए प्रति किलो पर आ पहुंची है। ऐसे में बोतल निर्माण की लागत बढ़ने से बाजार में पानी की बोतलों के प्रिंट रेट में भी बढ़ोतरी हुई है। पहले जहां एक बोतल की कीमत 27 रुपये थी, वो अब 30 रुपए हो गई है।

पेट्रोकेमिकल महंगे, बढ़ी लागत

फिलहाल, ग्राहकों को पानी 20 रुपए प्रति लीटर ही मिल रहा है, क्योंकि दुकानदारों का मार्जिन कम हो गया है। हालांकि, एक थोक दुकानदार का कहना है कि, अगर आगे और कीमतें बढ़ेंगी तो हमें भी आकिरकर दाम बढ़ाने पड़ेंगे। लेकिन, हालातों पर गौर करें तो मिडिल ईस्ट में जारी जंग के हालात थमने के अनकरीब खास आसार दिखाई नहीं दे रहे हैं।

खाद्य सामग्री पर असर

यही नहीं, युद्ध के दुष्परिणाम रोजमर्रा के इस्तेमाल के बिस्किट, नमकीन, कुरकुरे जैसी कई खाद्य वस्तुओं पर दिखाई दे रहा है। क्योंकि, ये सब चीजें भी पॉलिथीन पैकिंग में ही आती हैं। फिलहाल, गौर करें तो बाजार में अभी जनवरी और फरवरी में तैयार हुए उत्पाद ही आ रहे हैं। जिन पर पुरानी कीमतें लागू हैं। लेकिन अब कई कंपनियां संकेत देने लगी हैं कि, आने वाले समय में इन उत्पादों की कीमतों में एक से पांच रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा खाद्य तेल, जो प्लास्टिक बोतलों और केन में पैक होता है, उसके दाम भी पांच से दस रुपए बढ़े हैं।

दवाओं की कीमतों में वृद्धि

युद्ध का असर दवा उद्योग पर भी पड़ा है। दवाओं की पैकेजिंग में इस्तेमाल सामग्री भी पेट्रोलियम उत्पादों से बनती है। माधौगंज के दवा कारोबारी प्रतीक गुप्ता के मुताबिक नई पैकिंग में आने वाली दवाओं की कीमतों में दो से पांच प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है। कुल मिलाकर पेट्रोलियम उत्पादों की बढ़ती कीमतों ने दैनिक जीवन को महंगा बना दिया है। उत्पादन लागत बढ़ने और कच्चे माल की कमी के कारण बाजार में हर स्तर पर कीमतों में वृद्धि हो रही है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।