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सेंट्रल इंडिया किडनी अस्पताल की पैथोलॉजी में काम करने वालों से एसआइटी ने की पूछतांछ

जुटाए कई दस्तावेज

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सेंट्रल इंडिया किडनी अस्पताल की संचालक डॉ. दुहिता पाठक और उसका पति डॉ. अश्वनी पाठक, दोनों वर्तमान में सेन्ट्रल जेल में बंद है।

जबलपुर. जेल में बंद सेंट्रल इंडिया किडनी अस्पताल की संचालक डॉ. दुहिता पाठक और उसके पति डॉ. अश्वनी पाठक आयुष्मान योजना के हितग्राही मरीजों की पैथोलॉजी रिपोर्ट में किए गए ‘खेल’ का पता लगाने के लिए बुधवार को एसआइटी अस्पताल पहुंची। विवेचना अधिकारी भेड़ाघाट थाना प्रभारी शफीक खान ने अस्पताल की पैथोलॉजी में काम करने वाले कर्मचारियों से दो घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान विभिन्न जांचों का मरीजों की फाइलों में मिली पैथोलॉजी रिपोर्ट से मिलान भी किय ागया। टीम ने पैथोलॉजी में जांच में उपयोग किए जाने वाले उपकरणों की भी विस्तार से जानकारी ली। डॉ. दुहिता पाठक और डॉ. अश्वनी पाठक आयुष्मान योजना के मरीजों की फाइलों में फर्जी रिपोर्ट्स का उपयोग करते थे।

बार-बार रेफर करने वाले भी निशाने पर

कई आयुष्मान योजना के हितग्राही मरीजों को सेन्ट्रल इंडिया किडनी अस्पताल में रेफर करने वाले शहर और आसपास के जिलों के डॉक्टर्स भी एसआइटी के निशाने पर आ गए हैं। टीम द्वारा पैथॉलाजी कर्मियों से पूछताछ कर यह भी पता लगाने का प्रयास किया गया कि किन जिलों से अधिक मरीज आते थे और उन्हें कौन डॉक्टर्स रेफर करता था। उन्हें भी पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।

कम्प्यूटर देखे, दस्तावेज जांचे

टीम ने अस्पताल के एक-एक कम्प्यूटर की जांच की। अस्पताल के रिकॉर्ड रूम तक भी टीम पहुंची। जहां पैथॉलॉजी में हुई विभिन्न जांचों की फाइलें देखीं। इस दौरान उन मरीजों का भी ब्यौरा जुटाया गया, जो गंभीर बीमारियों से पीड़ित थे।

जेल में जल्द हो सकती है पूछतांछ

एसआईटी ने डॉ. दुहिता पाठक और डॉ. अश्वनी पाठक की पुलिस रिमांड न्यायालय से मांगी थी, लेकिन न्यायालय ने रिमांड नहीं दी। अब पुलिस दोनों से जेल में पूछताछ करेगी। इसके लिए जल्द ही न्यायालय में आवेदन देकर अनुमति ली जा सकती है।