
संयुक्त परिवार,
- कोरोनाकाल ने समझाया एक दूसरे के साथ का महत्व
जबलपुर।
गढ़ा निवासी एक परिवार के बड़े दो बेटे विवाह के बाद माता-पिता से अलग होकर रहने लगे थे। कोरोनाकाल में इनमे से दो बेटों के यहां संक्रमण फैला। उधर, बूढ़े पिता की भी पुरानी स्वांस की बीमारी ने जोर पकड़ा। लेकिन दोनों बेटे व पिता शहर के अलग-अलग मोहल्लों में रहने व दिलों में दूरी ज चलते एक दूसरे के हालात नही जान पाए। सभी ने अलग-अलग रहकर दुख की घड़ी बिताई। ऐसे में बेटों के मन मे आया कि काश संयुक्त परिवार का पुराना वक्त फिर से लौट आये, और वे फिर से सुख-दुख बांट सकें, एक दूसरे के काम आ सकें। लेकिन परिवार से अलग हो जाने के त्रुटिबोध के चलते वे अपने पिता के सामने जाने व उनसे यह कहने में झिझक रहे थे। ऐसे में उनके समाज का संगठन सामने आया। पदाधिकारियों ने पिता-पुत्रों के बीच मनमुटाव को दूर करवाया और परिवार को फिर से एकजुट करवा दिया। समाज के अन्य दायित्वों के निर्वहन के साथ सामाजिक संगठन अब बिखरे परिवारों को एकजुट करने में भी मददगार साबित हो रहे हैं।
बड़ी संख्या में घर वापस हो रहे युवा-
आधुनिकता के दौर में बिखरते संयुक्त परिवारों ने समाज को कमजोर किया है। कोरोनाकाल में परिवार के सदस्यों का महत्व उन लोगों को बखूबी समझ में आया, जो एकाकी परिवार में जी रहे थे। एक दूसरे के साथ का महत्व जानकर अब संयुक्त परिवार से अलग हुए युवा परिवार में वापस लौट रहे है। खास बात यह है कि संस्कारधानी के सामाजिक संगठन इसके लिए पहल कर रहे हैं। बिखरे परिवार के सभी सदस्यों को समझाईश दी जा रही है। बड़ों को क्षमा व छोटों को अपनी गलतियां स्वीकार करने के लिए प्रेरित कर टूटे संयुक्त परिवारों को फिर से जोड़ने के प्रयास हो रहे हैं। कोरोनाकाल के बाद से अब तक बड़ी संख्या में ऐसे बिखर रहे संयुक्त परिवार इन संगठनों के प्रयासों से फिर एक हुए हैं। इसे समाज के नवनिर्माण के लिए सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
वरिष्ठजनों से सम्पर्क-
परिवार की महत्ता समझ कर वापस लौटने की इच्छा रखने वाले युवा बड़ी संख्या में समाज के वरिष्ठजनों से सम्पर्क कर रहे हैं। अपनी गलती के चलते ये सीधे घर के लोगों के सामने जाने में भी झिझकते हैं। ऐसे में सामाजिक संगठन सुलह में इनकी मदद कर रहे हैं। साहू समाज के पदाधिकारियों ने बताया कि बीते दो वर्षों में ही लगभग 50 ऐसे युवाओं ने उनसे परिवार में लौटने की इच्छा जताई। उनकी परिजनों से सुलह कराई गई।
साथ बैठाकर काउंसिलिंग-
युवा यादव महासभा ऐसे मामले आने पर परिवार के सभी सम्बन्धितों को साथ बैठाकर काउंसिलिंग करती है। समाज के वरिष्ठजन व विद्वान लोगों के जरिये सभी पक्षों को अलग-अलग रहने के नुकसान व साथ साथ रहने के फायदे समझाते हैं। सभी से पूर्व में साथ रहते वक्त के अच्छे पल साझा करने व उनके बारे में विचार करने को कहा जाता है। परिवार के छोटे सदस्यों को वरिष्ठजन समझाईश के साथ उनकी गलतियों के दुष्परिणामों के बारे में बताया जाता है। पदाधिकारी बताते हैं कि बीते वर्ष ही ऐसे लगभग 25 परिवारों को एकजुट करने के सफल प्रयास समाज की ओर से किये गए ।
दिक्कतें दूर करने में सहयोग-
सामाजिक संगठन ऐसे परिजनों को एकजुट करने में आ रही दिक्कतों को भी दूर करने में मदद करते हैं। राजपूत क्षत्रिय महासभा के सामने भी बीते दिनों ऐसे मामले बड़ी संख्या में आए। महासभा के अध्यक्ष शैलेंद्र सिंह ठाकुर ने बताया कि बिखरे परिवार को एकजुट करने में आ रही दिक्कतों को परिजनों के जरिये ही दूर करने के प्रयास होते हैं। बड़ा मकान खोजना, मकान के लिए लोन में मदद, परिजनों की परिवार में जिम्मेदारी तय करना जैसे अहम कार्यों में महासभा सक्रिय योगदान दे रही है।
बुजुर्गों को करते हैं आगे-
सामाजिक संगठन ऐसे मामलों में सुलह के लिए पदाधिकारियों के अलावा समाज के ऐसे बुजुर्गों को आगे करते हैं, जिनका समाज मे विशेष सम्मान है। बिछड़े परिजनों को ये बुजुर्ग ऊंचनीच व एकता का महत्व समझाते हैं। साथ ही संयुक्त परिवार में आनेवाली पीढ़ी के सुरक्षित भविष्य के बारे में बताया जाता है। बुजुर्ग हरसंभव कोशिश कर बिखरे परिवारों को मिला रहे हैं।
लौटने वालों का होता है सम्मान-
सामाजिक संगठन संयुक्त परिवार में वापस लौटने वालों को प्रोत्साहन के अलावा सम्मानित भी करते हैं। सामाजिक परिचय सम्मेलन के साथ होने वाले सम्मान समारोहों में गणमान्यजनों से ऐसे लोगों का सम्मान कराया जाता है। कल्चुरि महासभा के पदाधिकारियों का कहना है कि घर वापस लौटने वालो के सम्मान से दूसरे लोगों को भी संयुक्त परिवार की महत्ता समझ मे आती है।
इनका कहना है-
कोरोनाकाल के बाद समाज मे संयुक्त परिवार का महत्व युवाओं को समझ में आ रहा है। युवाओं को घर वापसी के लिए प्रेरित किया जा रहा है। मदद की जा रही है।
-मनोहर चौकसे, अध्यक्ष कल्चुरि महासभा
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मिलजुलकर रहने में ही परिवार की शान है। बुजुर्गों की उपस्थिति नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक है। बिखरे परिवारों को जोड़ने में हरसम्भव मदद की जा रही है।
- अधिवक्ता अर्जुन साहू, संरक्षक गढ़ा साहू समाज
Published on:
16 Jun 2023 12:47 pm
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