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कहीं अधूरा स्कूल भवन, कहीं जर्जर बल्लियों पर टिका छप्पर

बारिश में नौनिहालों के सामने खड़ी मुश्किलें, दुर्घटनाओं का बना अंदेशा, स्कूल भवनों को लेकर अफसरो को फिक्र नहीं, स्कूलों का नहीं हुआ सर्वे न चिन्हाकंन

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Somewhere incomplete school buildings, so far dilapidated building

Somewhere incomplete school buildings, so far dilapidated building

जबलपुर।

केस-1

दो साल में भी अधूरा भवन रानीताल स्थित स्कूल भवन की नई बिल्डिंग का निर्माण किया जा रहा है। इस भवन में दो स्कूलों को लगाने की योजना है। लेकिन दो सालों के दौरान यह स्कूल अब तक बनकर तैयार नहीं हो सका है। भवन में खिडक़ी, दरवाजे, बिजली, फिलिंग, पेंट आदि का कार्य बाकी है। ऐसे में नए सत्र में भवन की सौगात मिलना मुश्किल है।

केस-2

सड़ी बल्लियों पर टिका छप्पर हालात-यह शहर का सबसे पुराना स्कूल है। प्राथमिक एवं माध्यमिक कक्षाएं लगती हैं। करीब 150 छात्र स्कूल में अध्यनरत हैं। छप्पर के नीचे बैठकर पढऩे वाले इस स्कूल भवन की कई बल्लियां सड़ चुकी है तो कुछ में दीमक लग गई है। इन दीमक लगी बल्लियों पर छप्पर टिका है। ऐसे मे बारिश में गंभीर स्थिति निर्मित हो सकती है।

केस-3

स्कूल और आंगनबाड़ी साथ मेंतिलकभूमि की तलैया स्थित सरकारी प्राथमिक शाला भवन में स्कूल के साथ आंगनबाड़ी केंद्र भी संचालित हो रहा है। यहां करीब 60 बच्चे अध्ययनरत हैं। भवन की दीवारों में दरारे हैं। बारिश में दीवारों पसीजने लगती है। बंद पड़े स्कूल में व्यापारियों ने अतिक्रमण कर रखा है।

केस-4

स्कूल का गिर चुका छज्जा चेरीताल कन्या हाईस्कूल में करीब 200 छात्राएं पढ़ती हैं। स्कूल भवन की दीवारों में दरारे हैं। पिछले साल स्कूल के एक कमरे का छज्जा कमजोर होकर अचानक गिर गया था। यह गनीमत थी कि उस वक्त छात्राएं कक्ष में नहीं थी। स्कूल की नई प्रस्तावित बिल्डिंग पर दो सालों से काम शुरू नहीं हो सका। जबलपुर।

कहीं स्कूल को खुद की छत नसीब नहीं हो सकी है तो कहीं जर्जर बल्लियों के सहारे स्कूल की छत टिकी है। स्कूल भवनों की न तो सफाई हुई न ही मरम्मत शुरू हो सकी। जबकि शिक्षण सत्र शुरू होने में जहां चंद रोज बाकी है तो वहीं मानसून भी सिरपर खड़ा है। ऐसे में नए सत्र के दौरान स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा मंडरा रहा है तो वहीं दुघर्टना का भी अंदेशा बना हुआ है। कुछ ऐसी ही स्थिति जिले के सरकारी स्कूलों की निर्मित है। नए शिक्षण सत्र को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग अब तक ऐसे स्कूलों की चिन्हित नहीं कर सका है।

100 स्कूल सुविधाहीन

शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के करीब एक सैकड़ा से अधिक स्कूल ऐसें हैं जो सुविधा विहनी है। इन स्कूलों में किसी की छत जर्जर है तो दीवारें क्रेक है। कहीं पीने का पानी नहीं है तो किसी स्कूल के बच्चों को जनशिक्ष केंद्र में पढऩे की मजबूरी बनी है।

मई में हो जाना था सर्वे

स्कूलों की आवश्यकताओं, कमियों और मरम्मत कार्य के लिए मई में स्कूलों का सर्वे हो जाना था। तकि 15 जून के पहले सभी तरह के कार्य पूरे किए जा सके। लेकिन न तो स्कूलों का सर्वे हो सका न ही रिपोर्ट तैयार हो सकी। ऐसे में स्कूलों में मरम्मत कार्य ही शुरू नहीं हो सका।

-स्कूल भवन निर्माण का कार्य पीआईयू के द्वारा किया जा रहा है। देरी क्यों हो रही है इसकी जानकारी ली जाएगी। स्कूलों की मरम्मत के लिए लोकल फंड का इस्तेमाल करने के आदेश जारी किए गए हैं। खतरनाक भवनों को चिन्हित करने एवं कक्षाएं न लगाने के निर्देश दिए हैं।

-सुनील नेमा, जिला शिक्षा अधिकारी