
Orphan child
जबलपुर. पांच साल का केशव (बदला हुआ नाम) अब अनाथ नहीं रहेगा। अब उसे गोद लेने वाले माता-पिता मिल गए हैं। वह स्पेन में कारोबारी परिवार के घर की रौनक बनेगा। गोद लेने सम्बंधी प्रक्रिया कलेक्टर न्यायालय से शुरू होने के बाद यह पहला आदेश जिले में जारी हुआ है। दो बच्चों के प्रकरण अभी कोर्ट में चल रहे हैं। पूर्व में इस तरह के मामले जिला न्यायालय द्वारा निपटाए जाते थे।
कलेक्टर न्यायालय में गोद लेने सम्बंधी पहले प्रकरण में विदेशी दम्पती को बच्चा दिया गया गोद
नि:संतान दम्पती की तरफ से बच्चों को दत्तक ग्रहण (गोद लेना) किया जाता है। इसमें अनाथ और रिश्तेदारों के बच्चे भी शामिल रहते हैं। शहर में मातृछाया सेवा भारती में निवासरत बच्चों को गोद लिया जाता है। केशव भी इनमें शामिल हैं। उसके माता-पिता की मृत्यु होने के बाद उसका मुंहबोला भाई उसका पालन पोषण कर रहा था। आगे उसकी परवरिश करने में असमर्थ रहने के चलते उसने बाल संरक्षण समिति के माध्यम से उसे संस्था में छोड़ा है।
गोद लेने सम्बंधी कार्यवाही करने वाली संस्था कारा के माध्यम से स्पेन के नि:संतान दम्पती ने आवेदन दिया था। इसमें उन्होंने भारतीय बच्चे को गोद लेने का विकल्प भी दिया था। दिल्ली में कारा के दफ्तर से आवेदन के साथ आए 36 प्रकार से अधिक दस्तावेजों की जांच की गई। फिर जिला बाल संरक्षण अधिकारी के माध्यम से कलेक्टर न्यायालय में दत्तक ग्रहण सम्बंधी प्रकरण लगाया गया। दो माह में स्पेन के दम्पती केशव को अपने साथ ले जाएगी।
यूरोपीय देशों में गए ज्यादातर बच्चे
जबलपुर से अब तक 16 बच्चे देश के बाद दत्तक ग्रहण किए गए हैं। इनमें ज्यादातर बच्चे यूरोपीय देशों में गए हैं। इनमें इटली, फ्रांस, स्पेन शामिल हैं। कनाडा, न्यूजीलैंड और अमेरिका में भी बच्चों का दत्तक ग्रहण किया गया है। भारत में ही जबलपुर से अब बीते पांच वर्ष में 47 से अधिक बच्चों को गोद लिया गया है।
कलेक्टर न्यायालय से पांच वर्ष के बच्चे को देश के बाहर दत्तक ग्रहण करने का आदेश जारी किया गया है। अगले दो माह के भीतर गोद लेने वाले व्यक्तियों को बच्चा सौंप दिया जाएगा।
- संजय अब्राहम, जिला बाल संरक्षण अधिकारी
Published on:
08 Feb 2023 11:10 am
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