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जबलपुर. बदलते समय के साथ स्पीच थेरेपी और ऑडियोलॉजी में कॅरियर बनाने में युवा आगे आ रहे है। ऑडियोलॉजी और स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजी को संक्षेप में बीएएसएलपी कहा जाता है। पहले बीएएसएलपी यूजी डिग्री कोर्स दुनिया की प्रमुख यूनिवर्सिटी में ही कराया जाता था। अब यह कोर्स नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में भी हो रहा है। यहां से निकल रहे प्रोफेशनल उन लोगों का जीवन सामान्य बनाने में मददगार बन रहे हैं, जिन्हें जन्मजात या दुर्घटनावश सुनने, बोलने, निगलने समेत नाक, कान, कंठ से संबंधित किसी प्रकार की समस्या है।
बोलने-सुनने में असमर्थ लोगों के लिए मददगार बनी स्पीच थेरेपी
4 साल का डिग्री कोर्स
ऑडियोलॉजी और स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजी 4 साल का प्रॉफेशनल डिग्री कोर्स है। इसके पाठ्यक्रम में ऑडियोलॉजी, लैंग्वेज पैथोलॉजी और स्पीच पैथोलॉजी के सैद्धांतिक और व्यावहारिक पक्षों की पढ़ाई होती है। बीएएसएलपी डिग्रीधारक स्वयं की क्लीनिक खोल सकते हैं।
केस 1
8 साल के बच्चे को निगलने में समस्या थी। वह खाना भी ठीक से नहीं खा पाता था। माता-पिता कई नाक- कान-गला रोग विशेषज्ञों को दिखा चुके थे। मेडिकल अस्पताल के ऑडियोलॉजी और स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजी सेंटर में साढ़े तीन महीने की थैरेपी में बच्चे की समस्या दूर हो गई।
केस 2
16 साल की एक किशोरी पढ़ने-लिखने में होशियार है। उसे जन्म से हकलाने की समस्या थी। परिवार के लोग उसके भविष्य को लेकर चिंतित थे। मेडिकल अस्पताल के सेंटर में एक साल की थैरेपी के बाद बच्ची का हकलाना दूर हो गया। अब वह सामान्य बच्चों के जैसी बात करती है।
बीएएसएलपी यूजी डिग्री कोर्स कर जन्मजात या दुर्घटनावश बोलने, सुनने, बोलने, निगलने में असमर्थ लोगों का इलाज किया जा सकता है। इस क्षेत्र में कॅरियर को लेकर भरपूर संभावना है।
- डॉ. अनिरुद्ध शुक्ला, ईएंडटी विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज अस्पताल
Published on:
26 Jul 2023 03:13 pm
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