
saraswati pratima
बंग समाज करेगा विशेष आराधना, बच्चों की शिक्षा का होगा शुभारंभ
जबलपुर । इस साल 26 जनवरी को राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के साथ बसंत पंचमी और अबूझ मुहूर्त भी है। इस दिन कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है, जो अत्यंत शुभ फलदायक माना जाता है। बसंत पंचमी का दिन मां सरस्वती को समर्पित है। बसंत पंचमी पर संस्कारधानी में अनेक स्थानों पर मां सरस्वती की मनोहारी प्रतिमाएं स्थापित कर पूजा-अर्चना की जाएगी।शहर के बंग भाषी समाज में बसंत पंचमी की पूजा का विशेष महत्व है।बंग समाज में अक्षर ज्ञान की शुरुआत करने वाले बच्चों के लिए वसंत पंचमी का दिन खासा अहम होता है। मान्यता है कि जो बच्चा बसंत पंचमी पर हाथेखोड़ी की परंपरा के साथ अपनी शिक्षा की शुरुआत करता है, उसे जीवन में सफलता मिलती है। बसंत पंचमी पर बंगाली समाज की दुर्गा बाड़ी, काली बाड़ी में सरस्वती पूजा की जाएगी। सिटी बंगाली क्लब में हाथेखोड़ी परम्परा के तहत विद्यार्थी अंजलि देकर शिक्षा की शुरूआत करेंगे।
घरों में भी आयोजन-
मां सरस्वती के समक्ष पंडित द्वारा पूजन के बाद हुई हाथेखोड़ी की परंपरा के दौरान बच्चे हाथों में पेंसिल लेकर स्लेट पर अक्षर उकेरते हैं। हाथेखोड़ी के लिए सिटी बंगाली क्लब में सुबह से ही माता—पिता अपने छोटे बच्चों को लेकर पूजा कराने पहुंचते हैं। बंगाली समाज के लोग अपने घरों में पंडित बुलाकर भी वसंत पंचमी की पूजा करते हैं। उनके घरों में भी हाथेखोड़ी का आयोजन होता है। इसके साथ ही वसंत पंचमी के दिन बंग समाज के लोग अपने घरों में सरस्वती प्रतिमा की स्थापना करके उनका पूजन अर्चन भी करते हैं। अंजलि देकर मां की आराधना होती है और भोग का वितरण किया जाता है। वसंत पंचमी के दूसरे दिन गोटा सिद्धू की परंपरा में उबला हुआ साबुत फल या सब्जी खाने की भी परंपरा का निर्वहन किया जाता है।
मौसम भी हुआ वासंती-
ऋतुराज बसंत के आगमन के साथ खेत-खलिहान और फुलवारियों में फूलों की खुशबू बिखर रही है। प्रकृति के इस रंग में रंगकर लोग पीले रंग के परिधान पहन रहे हैं। बसंत ऋतु में शीत का प्रकोप कम होता है। पशु-पक्षियों के लिए सर्दी कम होती है। उनका कलरव बढ़ जाता है और प्रकृति दर्शनीय हो जाती है। ऋतुराज बसंत में न ज्यादा सर्दी होती है और न ज्यादा गर्मी। प्रकृति दर्शन से प्रसन्नता का भाव उत्पन्न होता है। आम के पेड़ों में बौर आ गई हैं। ज्योतिर्विदों के अनुसार पीले रंग का जुड़ाव अध्यात्म साधना से हैं। विद्यार्थी, कला व साहित्य से जुड़े लोग भगवती शारदा की उपासना कर उन्नति की प्रार्थना करेंगे। बसंत पंचमी को शिक्षण प्रशिक्षण संस्थानों में सरस्वती पूजन कार्यक्रम होंगे।
यहां होगी प्रतिमा स्थापना, विशेष पूजा-
घमापुर शीतला माई वार्ड स्थित शीतला माई मंदिर, बगलामुखी मठ सिविक सेंटर, त्रिपुर सुंदरी मन्दिर तेवर, हरे कृष्णा आश्रम भेड़ाघाट ,चौसठ योगिनी मंदिर ,सनातन धर्म श्री कृष्ण मंदिर गोरखपुर ,जय माता महाकाली कल्याण मंदिर कछियाना, परमहंस आश्रम के पीछे लम्हेटाघाट ,गायत्री शक्तिपीठ मनमोहन नगर एवं श्रीनाथ की तलैया सहित अन्य स्थानों में सरस्वती माता की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। विशेष पूजन अनुष्ठान भी होंगे।
Published on:
25 Jan 2023 11:57 am
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