
Stress is increased when the hypothalamus is active
जबलपुर . सोशल मीडिया के इस दौर में भले ही हम टेक्नोलॉजी के करीब आ चुके हैं, लेकिन रिश्तों के दायरे से दूर होते जा रहे हैं। मोबाइल में समय बिताने के कारण परिवार में साथ बैठना और बाते करना भी कम हो चुका है, जो रिश्ते कमजोर करने के साथ उनमें दूरी भी बढ़ा रहे हैं। यह दूरी और बातों का आभाव ही स्टे्रस बढ़ाने का एक बड़ा काम कर रहा है। स्ट्रेस को बढ़ाने में ह्यूमन ऑर्गेन में अलग-अलग बदलाव होते हैं, जो इंसान को अपने घेरे में ले लेता है। यह सब हाइपोथेलेमस एक्टिव होने के कारण होता है। जब भी दिमाग में यह पार्ट एक्टिव होता है तो तुरंत ही लोगों में स्ट्रेस नजर आता है। इस वल्र्ड स्ट्रेस अवेयनेस डे पर आइए जानते हैं कि किस तरह से स्ट्रेस मैनेजमेंट अपना कर पॉजिटिव रह सकते हैं।
इस तरह लाएं बदलाव
प्रॉपर डाइट को शामिल करके
प्रतिदिन योगा और मेडिटेशन करके
थिंक पॉजिटिव का कॉन्सेप्ट
नैगेटिव लोगों से दूरी बनाकर
टेंशन वाले कामों से हल्के मूड में लेना
कैफीन और अल्कोहल से दूरी बनाना
इसलिए होता है स्ट्रेस
सिटी एक्सपट्र्स का कहना है कि वर्तमान में हर एज ग्रुप के लोग स्ट्रेस से घिर रहे हैं। इसका बड़ा कारण लाइफ स्टाइल में होने वाले बदलाव हैं। जरूरत से ज्यादा कैफीन और अल्कोहल का उपयोग लोगों में स्ट्रेस बढ़ाने का काम कर रहा है। इसके विपरीत वर्तमान में लोगों के पास मिलने-जुलने का समय नहीं होने के कारण भी रिश्तों में दूरी बनाने के साथ स्ट्रेस बढ़ा रहा है।
इस तरह अपनाते हैं स्ट्रेस मैनेजमेंट
दिनचर्या का पता लगाना।
फैमिली से बातचीत करना
योगा थैरेपी पर फोकस
परेशानी की वजह जानना
टाइम मैनेजमेंट पर फोकस
सेशन लगाना
किसी भी व्यक्ति के अंदर स्टे्रस तभी होता है, जब उसमें हाइपोथेलेमस एक्टिव होता है। इसके एक्टिव होने पर हर तरह के मोशन और इमोशन भी एक्टिव हो जाते हैं। कैमिकल रिएक्शन होने पर स्ट्रेस बढऩे लगता है।
डॉ. रत्ना जौहरी, मनोवैज्ञानिक
व्यक्ति में सेंटर और कॉर्निकल एरिया में जब भी इफेक्ट होता है तो बॉडी में स्ट्रेस डवलप होने लगता है। इसके लिए जरूरी है कि लाइफस्टाइल में बदलाव करना। प्रॉपर डाइट न लेना भी स्ट्रेस को बढ़ाने का काम करता है।
डॉ. स्वप्निल अग्रवाल, मनोचिकित्सक
Published on:
16 Apr 2019 11:11 am
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