
dr kalam
जबलपुर, पंडित लज्जाशंकर झा उत्कृष्ठ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शनिवार को देश के बड़े वैज्ञानिकों में शुमार ब्रह्मोस एयरोस्पेस व डीआरडीओ डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन के डायरेक्टर डॉ. सुधीर कुमार मिश्रा व ऑर्डेनेंस फैक्ट्री बोर्ड के चेयरमैन सौरभ कुमार ने आधुनिक सांइस लैब व छात्रावास का लोकापर्ण किया। इस लैब का नाम पूर्व राष्ट्रपति और मिसाइलमैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम व छात्रावास का नाम बह्मोस मिसाइल के नाम पर रखा गया है। इसके पीछे का मकसद कलाम लैब से विद्यार्थियों को वैज्ञानिक बनने की प्रेरणा देना है। इस दौरान केबिनेट मंत्री लखन घनघोरिया व शाला प्राचार्य वीणा वाजपेयी समेत अन्य मौजूद रहे। इस दौरान आयुध निर्माणी खमरिया में बने बम और विभिन्न आयुध वाहनों के मॉडल भी आकर्षण का केन्द्र रहे।
लैबों में यह खास
फिजिक्स:-ट्रांजिस्टर, एस्टोमॉमिकल, ऑप्टीकल पेंच, इस्ट्रेक्टोस्कोप समेत जनरेटर और प्लेनेट मॉडल
कैमेस्ट्री:- फ्रिज, कपेट, ड्यूरेज, गैस कनेक्शन, वीकर, लैंप समेत सभी सामान नया।
बायोलॉजी:- किडनी, हार्ट समेत बॉडी पाटर््स के मॉडल, परखनलियां, किटबॉक्स समेत अन्य
लैबों में यह खास
कंप्यूटर, प्रिंटर, पूरी तरह से वाईफाई इंटरनेट, हाईटैक ओवरहेड प्रोजेक्टर, सभी मिसाइलों के लिटरेचर, सभी मिसाइलों की तस्वीरें, विभिन्न प्रकार के
यह है खास
- लैब के सामने डॉ. कलाम की प्रतिमा स्थापित की गई है।
- छात्रावास के सामने बह्मोस मिसाइल बनाई गई है।
चन्द्रयान 2 के लिए बोले डॉ. मिश्रा
ब्रह्मोस एयरोस्पेस व डीआरडीओ डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन के डायरेक्टर डॉ. सुधीर कुमार मिश्रा ने कहा कि चंद्रमा की सतह पर पहुंचने से पहले चंद्रयान से संपर्क टूटना दुख का विषय है, लेकिन उसे हमने चांद के पास तक पहुंचा दिया। यह पूरे देश के लिए एक बड़ी सफलता है। संपर्क टूटने के बाद समीक्षा की जा रही है। इस बार क्या कमियां रह गईं, इसका पता वैज्ञानिकों ने लगा लिया है। इसलिए अगली बार जब इसका प्रक्षेपण होगा, तो वह पूरी तरह से सफल होगा।
यह खास
लैब का नाम:- डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम लैब
छात्रावास का नाम:- बह्मोस छात्रावास
काम शुरू हुआ था:- मई 2016
काम पूरा हुआ:- 2019
लागत:- चार करोड़ रुपए
यहां हैं स्थित:- मॉडल हाई स्कूल
ये मॉडल रहे आकर्षण का केन्द्र
सारंग तोप, सुरंग रोधी वाहन, 120 एमएम मोर्टार, एरियल बम, 84 एमएम बम, मल्टीमोड हैण्ड गे्रनेड, धनुष तोप, 125 एमएमए टैंक एम्युनेशन, एल 17 राउंड समेत अन्य।
मिसाइलमैन का किस्सा, बह्मोस की खूबियां बताई
डॉ. मिश्रा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि बताया कि मिसाइलमैन डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भी एसएलबी की लॉंचिंग में फेल हो गए थे। लेकिन उन्होंने उसे विफलता नहीं माना, बल्की उससे सीखा। जिसके बाद उन्होंने देश को एक से बढकऱ एक सफलताएं दिलाई। उन्होंने बताया कि हम जमीन, समुद्र और आकाश तीनों से ब्रम्होस मिसाईल दागने में सक्षम है। जिसकी एक्यूरेसी देश के लिए फर्क की बात है लेकिन डीआरडीओ चाहता है कि उसे अपने बनाए हथियार इस्तेमाल करने की जरूरत न पड़े।
Published on:
07 Sept 2019 08:30 pm
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