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सुप्रीम कोर्ट ने शीतलहर प्रभावित मध्यप्रदेश, राजस्थान सहित 10 राज्यों से शेल्टर होम की स्थिति पर रिपोर्ट मांगी है। राज्य को शहरी बेघरों की आबादी, सर्वेक्षण की कार्यप्रणाली, शेल्टर्स की संख्या, शेल्टर्स के निर्माण के लिए आवंटित और उपयोग की गई कुल राशि और उनके संचालन, प्रबंधन से संबंधित सवालों के जवाब देने होंगे।
अधिवक्ता प्रशांत भूषण द्वारा दायर याचिका की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रवींद्र भट्ट और जस्टिस दीपांकर दत्ता की बेंच रही है। भूषण ने कोर्ट से कहा, यह अनुमान लगाया गया है कि देश की एक प्रतिशत से ज्यादा आबादी बेघर है। सर्दी की शुरुआत में उन्होंने खुद बहुत से लोगों को कड़ाके की ठंड में सड़कों पर सोते देखा है। उन्होंने मांग की, शहरी बेघरों को सर्दी से बचाने के लिए अपनाए गए अस्थायी उपाय पर उत्तर भारतीय राज्यों को स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया जाए।
देश के उत्तरी और उत्तरी-पश्चिमी हिस्से अभी भी भीषण शीतलहर की स्थिति से जूझ रहे हैं। इस पर खंडपीठ ने मध्यप्रदेश सहित उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, जम्मू और कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और बिहार राज्यों को शहरी क्षेत्रों में बेघर व्यक्तियों के शेल्टर्स देने की अपनी शीतकालीन योजनाओं और शुरू किए गए अस्थायी उपायों से अदालत को अवगत कराने का निर्देश दिया।
कमेटी करेगी मॉनिटरिंग
अदालत की यह भी राय है कि उक्त राज्यों को अपनी शीतकालीन योजना और शुरू किए गए अस्थायी उपायों पर स्थिति रिपोट दाखिल करना चाहिए। शहरी बेघरों के लिए भी अस्थायी आश्रयों का निर्माण सहित विभिन्न पहलुओं पर हलफनामा सूची दो सप्ताह के अंदर दायर किया जाना चाहिए। अदालत ने आदेश दिया कि दिल्ली हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज, जस्टिस कैलाश गंभीर के नेतृत्व में समिति का गठन किया जाए, जो अन्य बातों के साथ-साथ प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में उपलब्ध शेल्टर्स की संख्या निर्धारित करे, चाहे वे प्रासंगिक संचालन के अनुपालन में हों।
साथ ही आश्रय घरों की स्थापना में धीमी प्रगति का कारण को लेकर दिशानिर्देश दे, जिसमें इस उद्देश्य के लिए वितरित धन का कोई गैर-उपयोग या दुरुपयोग शामिल है। समिति को सर्दियों के दौरान शहरी क्षेत्रों में अस्थायी शेल्टर्स की स्थापना सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकारों को उपयुक्त सिफारिशें जारी करने का भी निर्देश दिया गया।
Published on:
21 Jan 2023 08:48 pm
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