सूर्य नमस्कार पर विधायक आरिफ मसूद बोले: ये सूर्य पूजा है और इस्लाम में मान्य नहीं
जबलपुर। राज्य की सभी शैक्षणिक संस्थाओं में आजादी के अमृत महोत्सव के तहत अनिवार्य सामूहिक सूर्य नमस्कार को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट ने सारहीन पाकर खारिज कर दी। चीफ जस्टिस रवि मलिमठ एवं जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव की डिवीजन बेंच के अनुसार जिस आयोजन को चुनौती दी गई थी, वह हो चुका है। याचिका सारहीन व अपोषणीय हो गई है। इसमें लगभग तीन लाख विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं।
हो चुका सामूहिक सूर्य नमस्कार अब सुनवाई का औचित्य नहीं
हाईकोर्ट ने विधायक आरिफ मसूद की जनहित याचिका खारिज कर कहा
भोपाल से विधायक आरिफ मसूद ने जनहित याचिका दायर कर शैक्षणिक संस्थानों में अनिवार्य सामूहिक सूर्य नमस्कार के आयोजन को चुनौती दी थी। कहा गया कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार की अधिसूचना पर एक जनवरी से सात फरवरी तक आजादी के अमृत महोत्सव के तहत 75 करोड़ सूर्य नमस्कार प्रोजेक्ट संचालित है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने भी 29 दिसंबर 2021 को अधिसूचना जारी कर सभी शैक्षणिक संस्थाओं में आयोजन की अनुमति दी। यह आयोजन 30 राज्यों के 30 हजार संस्थाओं में हो रहा है। इसमें करीब तीन लाख विद्यार्थी शामिल हो रहे हैं।
तर्क दिया गया कि सूर्य नमस्कार सूर्य पूजा है और इस्लाम में यह मान्य नहीं है। इससे उनके धर्म के लोगों की भावनाएं आहत होती हैं। इसे स्वेच्छिक करने का आग्रह किया गया था। गत सुनवाई पर हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि सूर्य नमस्कार विशुद्ध योग है और स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। इसका किसी पूजा से कोई सम्बंध नहीं और किसी की धार्मिक भावनाएं सूर्य नमस्कार से आहत नहीं होतीं।