
tarpan at Gwarighat
जबलपुर। हाथों में कुश, दूर्वा और पिंड। जल का अघ्र्य देते लोग। मंत्रोच्चार से गुंजायमान होते नर्मदा तट...। अश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा शनिवार को अलसुबह से संस्कारधानी में कुछ ऐसा ही नजारा था। पितृ पक्ष शुरू होने के साथ ही घरों से लेकर नर्मदा तटों और तालाबों में श्राद्ध और तर्पण आरम्भ हो गया है। पितृलोक से आशीष देने आए पुरखों को खुश करने के लिए उनकी तिथि के अनुसार लोग स्वादिष्ट पकवान का भोग लगा रहे हैं। पितरों को खुश करने के लिए शास्त्रों में उल्लेखित विधि के अनुसार गाय, कौआ, चीटी और मछलियों के लिए अनाज निकाला जा रहा है। पकवान बनाकर वैदिक पंडित को दान करने के साथ ही परिजन को आमंत्रित किया जा रहा है। श्राद्ध पक्ष के दौरान एक पखवाड़े तक तर्पण किया जाएगा।
पितृपक्ष से एक दिन पहले शुक्रवार को श्रद्धालुओं ने नर्मदा तटों सहित अन्य तीर्थों में डुबकी लगाकर पितरों का आह्वान किया। पितृ पक्ष के पहले दिन नर्मदा तटों पर बड़ी संख्या में लोगों ने पितरों को विधिपूर्वक तर्पण किया।
अच्छे कार्यों से प्रसन्न होते हैं पितर
ज्योतिर्विद् जनार्दन शुक्ला के अनुसार तर्पण और अच्छे कार्य करने से पितर प्रसन्न होते है। शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष में 15 दिन पितर वैकुंठ धाम से धरती पर आते हैं। जिस घर में पितर प्रसन्न होते हैं, उसी घर में देवता भी उपासना से प्रसन्न होते हैं।
तिथि के अनुसार पितृ श्राद्ध
पितरों के दिवंगत होने की तिथि के अनुसार पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म किया जाता है। पिंड को नर्मदा में प्रवाहित करने के बाद पितरों से सुख-शांति की प्रार्थना की जाती है।
ऐसे करें तर्पण
ग्वारीघाट में तीर्थ पुरोहित अभिषेक मिश्रा के अनुसार मंत्रोच्चार के बीच संकल्पित कुशा, जौ, तिल, अक्षत, पुष्प के साथ तर्पण किया जाता है। सबसे पहले पूर्व दिशा में खड़े होकर देवी-देवता और उत्तर दिशा में ऋषियों को तर्पण करना चाहिए। इसके बाद दक्षिण दिशा में पितर और 14 यमों को तर्पण करना चाहिए।
Published on:
15 Sept 2019 09:00 am
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