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फैशन के हिसाब से बदल रही डिजाइन, सलवार-सूट और कुर्ती की डिमांड बढ़ी

शहर के वस्त्र निर्माता कई वेरायटी के कपड़े बना रहे हैं। मुख्य उत्पाद सलवार सूट है। लेकिन इसमें फैशन के हिसाब से बदलाव पर ध्यान दिया जा रहा है।

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The design of salwar-suit, kurti is changing according to the fashion

The design of salwar-suit, kurti is changing according to the fashion

जबलपुर। शहर के वस्त्र निर्माता कई वेरायटी के कपड़े बना रहे हैं। मुख्य उत्पाद सलवार सूट है। लेकिन इसमें फैशन के हिसाब से बदलाव पर ध्यान दिया जा रहा है। वस्त्र निर्माता अब कुर्ती, कोटी कुर्ता, पायजामा, इंडो वेस्टर्न सूट भी बना रहे हैं।

पहले दक्षिण के राज्यों से यहां के 400 से अधिक कारखानें में लेडीज गारमेंट सीमित मात्रा में बनते थे। अब कई राज्यों में सप्लाई हो रही है। निर्माता परंपरागत सूट के अलावा फैशन के हिसाब से भी इनमें कई प्रकार के परिवर्तन कर रहे हैं। इसके लिए वे डिजाइनर्स की मदद भी ले रहे हैं। कई वस्त्र निर्माता बच्चों के लिए कपड़े बना रहे हैं। आधा दर्जन निर्माता अपने ब्रॉन्ड नाम से इनका विक्रय कर रहे हैं। इनकी सप्लाई भी कई राज्यों में हो रही है। शुभांशु जैन का कहना है कि बदलते परिवेश में कपड़ों की वेरायटी भी बदलनी पड़ेगी।

शहर में 200 इकाइयां
जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों सहित लेमा गार्डन में बने रेडीमेड गारमेंट कॉम्प्लेक्स में सूट का उत्पादन हो रहा है। यहां छोटी-बड़ी 200 इकाइयां हैं। इनका उपयोग गारमेंट निर्माता छोटे कारखाने और शोरूम के रूप में कर रहे हैं। इनमें कई वेरायटी के वस्त्र बन रहे हैं। हालांकि ज्यादातर निर्माण सलवार सूट का है। यहां के निर्माताओं का कहना है कि त्योहारों पर नई डिजाइन और वेरायटी के वस्त्र बनाए जा रहे हैं। यहां कॉटन, रेयान, जार्जेट और ङ्क्षसथेटिक कपड़े की कुर्ती तैयार हो रही हैं।

प्रदेश के कई शहरों में सप्लाई
शहर में बनने वाले सलवार सूट और कुर्तियों की बिक्री आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, ओडिशा, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में खूब होती है। लेकिन कुछ कारोबारियों ने इन वस्त्रों की सप्लाई मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में शुरू की है। इसका लाभ भी उन्हें मिल रहा है। जबलपुर के आसपास के जिलों के कुछ थोक कारोबारी अब यहां के गारमेंट की खरीदी के लिए आ रहे हैं। उनके लिए नए वस्त्रों के रूप में लेडीज और जेन्ट््स लोवर भी मिल रहे हैं। इनका उत्पादन भी खूब बढ़ रहा है। 150 इकाइयों में इन्हें तैयार किया जा रहा है।

गारमेंट क्लस्टर में सलवार सूट के साथ कुर्ती का काम तेज हुआ है। कुछ निर्माताओं ने बच्चों के कपड़े भी बनाना प्रारंभ किया है। त्योहारों के मौसम में इनका कारोबार भी ठीक हुआ है। अलग-अलग राज्यों से अच्छी मांग आ रही है।
दीपक जैन, एमडी, जबलपुर गारमेंट एंड फैशन डिजाइन क्लस्टर एसोसिएशन