जबलपुर। समय के साथ चुनाव का परिदृश्य भी बदल गया है, एक समय था जब नेताजी के प्रचार में जाने वाले कार्यकर्ता अपने घर से पूड़ी सब्जी बनवा कर ले जाते थे। जिस गांव में भोजन के लिए रुकते थे वहां भी पार्टी के कार्यकर्ता मिलजुल कर भोजन की व्यवस्था किया करते थे। कार्यकर्ता के घरों के लोग काम में जुट जाते थे, जिससे पार्टी कार्यकर्ता और उनके परिजनों का पार्टी से जुड़ाव बढ़ता था। काम करने की ललक रहती थी, उत्साह नजर आता था। अब यह सब देखने को नहीं मिलता।