
RDVV Jabalpur
जबलपुर. नए मिजाज के साथ आगे बढ़ता महाकोशल क्षेत्र हो या फिर जबलपुर शहर। यहां की नई पीढ़ी नए अंदाज में अंचल की नब्ज टटोल रही है। पर्यावरण-स्वास्थ्य, खानपान के तौर-तरीके, परम्परा-संस्कृति, कृषि, उद्योग-व्यापार, पर्यटन, बैंकिंग, डिजिटल लेनदेन, ऑनलाइन शॉपिंग, नौकरीपेशा-व्यापारी, बेरोजगार या फिर शहरी व ग्रामीण विकास, महिला उद्यमी, गरीब-मजदूर, बुजुर्ग और बच्चे आदि जबलपुर से जुड़े तमाम पहलुओं पर केंद्रित अध्ययन और विश्लेषण के जरिए समाधान की कोशिश की जा रही है। बात कर रहे हैं, सम्भाग की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के शोध छात्रों की। पिछले कुछ वर्षों में पीएचडी का पुराना ढर्रा तेजी से बदला है। शोध छात्र अब वैश्विक के बजाय स्थानीय समस्याओं के समाधान की दिशा में रुचि दिखा रहे हैं। पिछले पांच साल में तस्वीर बदल गई है। पीएचडी में वर्ष 2015 तक स्थानीय टॉपिक महज ढाई से तीन प्रतिशत होते थे। अब यह 35 से 40 प्रतिशत तक पहुंच गया है। कुछ विषयों खासकर लाइफ विज्ञान, वाणिज्य, गृह विज्ञान, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र में ज्यादातर शोध स्थानीय मुद्दों पर हुए हैं या हो रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘ग्लोबल से लोकल’ वाला बदलाव खासकर 2016 में पीएचडी के लिए यूजीसी के नए मापदंडों के चलते आया है। अब शोध कार्य में रुचि रखने वाला विद्यार्थी ही पीएचडी में प्रवेश ले रहा है। सख्त नियमों के चलते पूर्व में की गई पीएचडी के किसी हिस्से की नकल करना अब मुश्किल है। विभिन्न विभागों में बीते एक दशक में हुई पीएचडी के आंकड़ों पर गौर करें, तो 2010 से लेकर 2015 तक करीब पौने सात सौ पीएचडी में महज डेढ़ दर्जन विषय ही स्थानीय थे। लेकिन, 2016 से 2020 तक पीएचडी करने वालों की संख्या हर साल डेढ़ से दो सौ तक पहुंच गई। कोरोना काल में थोड़ी कमी जरूर हुई।
शोधार्थियों ने दिखाई दिलचस्पी
छात्रों ने वर्ष 2017 में ज्यादातर पीएचडी के लिए स्थानीय विषयों को चुना। महिला उद्यमियों की चुनौतियां, सीमेंट-कोयला उद्योगों में श्रमिकों की सुरक्षा, सहकारी और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों में डिजिटल लेनदेन जैसे नए विषयों को शामिल किया। डॉ. मनीष तिवारी ने बताया कि जबलपुर के संदर्भ में टेक्सटाइल्स की उपयोगिता लगातार बढ़ रही है। यह अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करती है। इसका रियल लाइफ में क्या उपयोग है? इसे लेकर शोधकार्य किया गया। शोधार्थी विजय अहिरवार ने बताया कि सिंचाई संसाधनों की उपयोगिता, उसके महत्व और खेती पर निर्भरता को लेकर अनुसंधान करने का विचार आया। इसलिए स्थानीय स्तर पर शोध के माध्यम से काम किया।
जबलपुर पर केंद्रित ये प्रमुख विषय
- जबलपुर सम्भाग के विषेष संदर्भ में आर्थिक विकास में पर्यटन उद्योग का योगदान
- जबलपुर में बेचे जाने वाले वाणिज्यिक ग्रेड के सूखे मेवों में कवक और मायकोटॉक्सिन पर अध्ययन
- जबलपुर शहर में ऑनलाइन शॉपिंग के प्रति उपभोक्ताओं का नजरिया
- भारतीय राजनीति में मुस्लिम सहभागिता। जबलपुर के संदर्भ में अध्ययन (1990 से वर्तमान तक)
- जबलपुर शहर में ऑनलाइन गारमेंट्स और एक्सेसरीज़ शॉपिंग के प्रति उपभोक्ताओं के व्यवहार का अध्ययन
कटनी, डिंडोरी, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा के मुद्दों पर भी अध्ययन
- जैविक खेती की समस्याएं और सम्भावनाएं। महाकोशल क्षेत्र के विशेष संदर्भ में
- बुंदेली और बघेली भाषा का तुलनात्मक अध्ययन कटनी के संदर्भ में
- नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पंचायती राज व्यवस्था बालाघाट जिले के संदर्भ में अध्ययन
- आदिवासी नेतृत्व : सिवनी जिले के संदर्भ में एक अध्ययन
- जनजातीय चित्रकला (डिंडोरी और मंडला क्षेत्र के विषेष संदर्भ में)
एक दशक : आंकड़ों में पीएचडी
2019-20 में 208
2018-19 में 142
2017-18 में 117
2016-17 में 204
2015-16 में 175
2014-15 में 217
2013-14 में 174
2012-13 में 152
2011-12 में 82
2010-11 में 53
वर्जन
-किसी भी क्षेत्र में अनुसंधान करने के लिए पहले भी किसी को रोका नहीं गया था और अब भी नहीं। स्थानीय और उपयोगी विषयों को लेकर लोगों का मनोविज्ञान बदलना होगा, तभी आगे चीजों को अच्छी तरह से सोचेंगे। सुपरवाइजर हो या चाहे शोधकार्य करने वाले, उनका भी मनोविज्ञान बदलने की आवश्यकता है।
डॉ. एडीएन बाजपेई, कुलपति, बिलासपुर विवि
-अनुसंधान में स्थानीयता भी आवश्यक है। ताकि, क्षेत्र की समस्याओं का समाधान ढूंढ़ा जा सके। स्थानीय, प्रादेशिक, राष्ट्रीय स्तर की समस्याएं भी होनी चाहिए। इस दिशा में बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय भी प्रयासरत है। पाठ्यक्रम इसके अनुकूल हो जो स्थानीय ज्ञान कराने के साथ समाधान कारक भी हो। छात्रों में नैतिक मूल्यों का होना भी आवश्यक है। नई शिक्षा नीति में भी इस पर जोर दिया गया है।
प्रो. कपिलदेव मिश्र, कुलपति, रानी दुर्गावती विवि
Published on:
08 Oct 2021 09:58 pm
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