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यहां के आवारी मवेशी सिर्फ रास्ती हीं नहीं रोकते हादसों का कारण् भी बनते हैं

जबलपुर में सड़कों से लेकर बाजारों तक दुर्घटना का खतरा  

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Traffic affected by cattle sitting on the road

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जबलपुर। कहने को तो जबलपुर शहर में पूरा एक अमला आवारा मवेशियों की धरपकड़ करने का दावा करता है। लेकिन, असल में शहर की सड़क और बाजारों से आवारा मवेशियों का जमावड़ा खत्म नहीं हो रहा है। सांड कब कहां से दौड़ जाए किसको सींग मार दे कोई भरोसा नहीं है। ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं। इसके बावजूद आवारा मवेशियों को नगर से बाहर करने अब तक उपयुक्त गौशाला की व्यवस्था नहीं हो सकी है। तिलवारा स्थित गौशाला पहले से हाउसफु ल है। रामपुर स्थित गौशाला में भी लगभग सौ मवेशियों को ही और रखा जा सकता है। आवारा मवेशियों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत हाका गैंग ने चौबीस घंटे में 23 आवारा मवेशियों को पकड़ा है।
उमरिया पिपरिया में नगर निगम की एक और गौशाला निर्माणाधीन है। जानकारों का मानना है की इस गौशाला के बन जाने पर निगम के पास आवारा मवेशियों को रखने के लिए उपयुक्त व्यवस्था हो जाएगी। निगम प्रशासन ने राजस्व विभाग से निगम सीमा में अन्य स्थल पर जमीन मांगी है। अगर मौजूदा गौशाला के आसपास जमीन मिल जाती है तो गौशाला को विस्तार मिल जाएगा। ऐसा करके आवारा मवेशियों को रखने की व्यवस्था की जा सकती है। नगर निगम के हाकागैंग प्रभाारी राजेंद्र पटेल ने बताया कि सप्ताहभर से आवारा मवेशियों को पकडऩे का अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान पछत्तर आवारा पशुओं को पकड़ा गया है। चौबीस घंटे में तेइस आवारा पशु पकड़े गए हैं।