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पाकिस्तानी सेना को सबक सिखाने वाला T55 टैंक जेइसी की बढ़ाएगा अब शान

पुणे से पहुंचा आज जबलपुर, तीन क्रेनों की ली गई मदद, भारतीय सेना का बढ़ाएगा गौरव  

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मयंक साहू @ जबलपुर
भारतीय सेना की शान कहे जाने वाले टी-55 युद्धक टैंक प्रतिष्ठित जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज में शुक्रवार को पहुंचा। इस टैंक को देर शाम कॉलेज परिसर में स्थापित किया गया। सेना के बाद अब यह जेइसी की शान में चार चांद लगाएगा। बताया जाता है टी-55 टैंक को पुणे डिफेंस डिपो से 6 मार्च को जबलपुर के लिए रवाना किया गया था। शुक्रवार को यह टैंक सड़क मार्ग से जबलपुर पहुंचा। इस टैंक को मुख्यद्वार के अंदर कैंपस के एक हिस्से में रखा गया है। इसके लिए पहले से प्लेटफार्म तैयार किया जा चुका था केवल टैंक के आने का इंतजार किया जा रहा था। इस टैंक को कॉलेज के भूतपूर्व छात्रों द्वारा कॉलेज की 75 वीं वर्षगांठ पर प्रदान किया गया है।
पाकिस्तान के खिलाफ बरपाया कहर
बताया जाता है टी-55 टैंक ने पाकिस्तान के साथ युद्ध में महात्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। सोवियत संघ द्वारा इसे तैयार किया गया था। बख्तरबंद टैंक से जमनी से लेकर आकाश में अचूक निशाना लगाया जा सकता था। इस टैंक ने भारत-पाक युद्ध में कहर बरपाया। यह टैंक 1983 बैच के पूर्व छात्रों वीके सक्सेना के प्रयासों से दिया गया है। प्लेटफार्म का निर्माण तरुण आनंद, नरेंद्र सिंह द्वारा किया गया। टैंक के आने के दौरान कॉलेज की ओर प्रो.रत्नेश गुप्ता, प्रो.आरके भाटिया सहित प्रबंधन एवं स्टूडेंट उपस्थित रहे।
तीन क्रेनों की ली गई मदद
31 टन वजनी टैंक को उठाने और प्लेटफार्म तक शिफ्ट करने में 3 हैवी क्रेनों का इस्तेमाल किया गया। लोडेड ट्राले से उठाकर इसे कैम्पस में बनाए गए प्लेटफार्म पर रखा गया। विदित हो कि इसके पूर्व जेइसी में मिग-21 आ चुका है। इसके साथ ही ब्रम्होस मिसाइल भी प्रदान किया जाना है। युद्धपोत के रूप में छोटा मॉडल भी दिया गया है। इस तरह जेइसी में देश की रक्षा से जुड़ी सामरिक महत्व की चीजें स्थाति होने से छात्रों को जहां सीखने, देखने का मौका मिलेगा तो वहीं देश प्रेम का भी जज्बा लोगों में पैदा होगा।
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-यह कॉलेज के लिए गौरव की बात है। कॉलेज के छात्र भारतीय सेना के शोर्य,पराक्रम को भी नजदीक से जान और समझ सकेंगे। इस टैंक को परिसर में स्थापित किया गया है।
-प्रो.एके शर्मा, प्राचार्य जबलपुर इंजीनियरिंग कॉलेज