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इस नाटक का डेढ़ सदी बाद यहां हुआ मंचन

विश्व रंगमंच दिवस के उपलक्ष्य में दो नाटकों की मनमोहक प्रस्तुति हुई

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Theater day

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कटनी । संप्रेषणा नाट्य मंच विगत कई दशकों से रंग मंच के कई पहलुओं पर कार्य करते हुए भिन्न-भिन्न शैलियों पर नाटक का मंचन किया है। इसी कड़ी में संप्रेषणा ने विश्व रंग मंच दिवस के उपलक्ष्य में दो नाटकों की मन मोहक प्रस्तुति हुई। पहला नाटक शीतला प्रसाद त्रिपाठी लिखित 'जानकी मंगल का मंचन किया गया। इसका निर्देशन द्वारिका दाहिया ने किया।


भक्तिमय हो उठा वातावरण
जानकी मंगल हिन्दी का पहला मंचित नाटक है जो आज से डेढ़ सदी पहले 1868 में लिखा गया। संप्रेषणा ने अपने दल के युवा कलाकारों के साथ आकर्षक वेश भूषा, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, कर्ण प्रिय संगीत के मध्य जानकी और रघुनाथ की लीला का मंचन किया। दर्शकों से परिपूर्ण आयुध निर्माणी सभागार में जब धनुष भंजन हुआ तब पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि किरण संस्था के अध्यक्ष टीकाराम कुशवाहा, विशिष्ट अतिथि लोक कला विशेषज्ञ इन्दावती, निर्देशक नीरज कुन्देर उपस्थित रहे।

मोहनी छवि को मंच पर उकेरा
जानकी मंगल में रघुनाथ की मन मोहनी छवि को मंच पर सौरभ थारवानी ने उकेरा, लक्ष्मण की भूमिका में शुभम रजक, जानकी के रूप में ज्योति सिंह, परशुराम के रौद्र रूप में केएल राव तथा जोधाराम जयसिंघानी, अनुज, निहाल, शिवानी, शिव कुमार, अनिल अतुल वर्मा, नवल, विवेक, आदित्य, नेहा केवट, साक्षी पांडे, वैष्णवी ने मुख्य भूमिका निभाई। नाटक गांधी ने कहा था के मुख्य पात्र तारकेश्वर पाण्डे का जीवंत अभिनय योगेश तिवारी ने किया। संप्रेषणा रंग मंडल के दोनों नाटक अभिनय और संवाद की प्रधानता लिए सफलता पूर्वक मंचित हुए। कार्यक्रम के कलाकारों में रोजलीन शाह, पूजा मिश्रा एकता परिहार, हिमांशु समुन्द्रे, गणेश माथुर, विनोद सूर्यवंशी, सविता दाहिया, सतीश अहिरवार, नीरज सेन, सीमा तिवारी गौरव भोंगरे आदि प्रभावी रहे। प्रस्तुति को सफल बनाने में रामाधार रजक, पूनम रंजन, अश्वनि गर्ग राजेश तिवारी, शकील अहमद, एरिक स्वामी पिटर, बघेल, भैया लाल पटेल, मनोज निगम, पीताम्बर शेतपाल आदि उपस्थित रहे।

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