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बिशप पीसी सिंह के नाम पर हैं 128 बैंक खाते, दो करोड़ से अधिक की एफडी

ईओडब्ल्यू की पूछताछ में खुलासा

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महरून रंग की जैकेट में बिशप पीसी सिंह

जबलपुर. आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो की ओर से गिरफ्तार किए गए द बोर्ड ऑफ एजुकेशन चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया जबलपुर डायोसिस के चेयरमैन बिशप पीसी सिंह की ओर से कुल 174 बैंक खाते की जानकारी दी गई। इनमें से 128 बैंक खाते उसके नाम पर हैं। अन्य 46 बैंक खाते उसके परिजनों और शैक्षणिक संस्थाओं के हैं। जिन्हें अलग-अलग लोगों की ओर से ऑपरेट किया जाता था। ईओडब्ल्यू की माने तो इन 128 खातों में करोड़ों रुपए की राशि जमा हो सकती है। पूछताछ के दौरान पीसी सिंह ने ईओडब्ल्यू की टीम को बताया कि उसके पास कुल दस एफडी हैं। जिसमें कुल दो करोड़ दो लाख 95 हजार 190 रुपए जमा हैं। यह एफडी कब बनाई गई और उसमें नॉमीनी कौन हैं, इसका भी पता लगाया जा रहा है।


यह है मामला
जर्मनी गए पीसी सिंह के घर में ईओडब्ल्यू की टीम ने गुरुवार को छापा मारा था। वहां से एक करोड़ 65 लाख 14 हजार रुपए नकद, 118 पाउण्ड, 18352 यूएस डॉलर, 80 लाख 72 हजार रुपए के सोने के दो किलो वजनी जेवरात समेत 17 संपत्तियों के दस्तावेज और 48 बैंक खातों के सम्बंधित दस्तावेज जब्त किए थे। बिशप पीसी सिंह समेत उसके परिजन और ट्रस्ट समेत स्कूल के 46 बैंक खातों को ईओडब्ल्यू की टीम ने सीज कर दिया था।
एक-एक खाते की जुटाई जाएगी
जानकारी ईओडब्ल्यू के मुताबिक बिशप पीसी सिंह द्वारा ऑपरेट किए जाने वाले सभी 128 बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है। जिसके बाद बैंकों को पत्र लिखकर यह जानकारी मांगी जाएगी कि वे बैंक खाते कब खोले गए और उनके माध्यम से पीसी सिंह द्वारा अब तक कितना ट्रांजक्शन किया और उसमें कहां से और कितनी राशि आई। ईओडब्ल्यू के मुताबिक यह राशि कई करोड़ों में होने की आशंका है।
अंतरराष्ट्रीय ट्रांजेक्शन की आशंका
ईओडब्ल्यू की टीम की माने तो इन बैंक अकाउंट्स में विदेशी फंडिंग भी की जाती थी। समय-समय पर विदेशों से पीसी सिंह के इन अकाउंट्स में बड़ी रकम आती थी। पीसी सिंह की ओर से भी बड़ी रकम विदेशों में ट्रांसफर की जाती थी। ईओडब्ल्यू की टीम उन सभी संस्थाओं और लोगों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है, जिन्हें रकम का ट्रांजेक्शन किया जाता था। पुलिस रिमांड के दौरान आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने पीसी सिंह से यह पता लगाने का प्रयास किया कि आखिरकार उसने इतने बैंक अकाउंट्स क्यों खुलवाए।