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रेलवें में शूज-रेनकोट में सामने आया गड़बड़झाला

कमेटी को असली दिखाकर बांट दिए घटिया शूज- रेनकोट, रेल ट्रेक पर चलते हो गए क्रेक, निम्न गुणवत्ता के लगे आरोप, रेल प्रशासन के बीच हड़कंप  

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जबलपुर.रेल कर्मचारियों को सुरक्षा की दृष्टि से बांटे गए शूज एवं रेनकोट में गड़बड़ी सामने आई है। घटिया सामग्री वितरण के चलते शूज तीन माह में ही खराब हो गए तो वही रेनकोट भी फटने लगे। यह मामला रेल प्रशासन पहुंचने के बाद हड़कंप देखा जा रहा है। यह सामग्री रेल ट्रैक में काम करने रेल कर्मचारियों को सुरक्षा की दृष्टि से रेल प्रशासन द्वारा निजी फर्म के माध्यम से उपलब्ध कराई गई थी। ताकि रेल ट्रेक में सुरक्षा और संरक्षा भी बनी रहे। रेल प्रबंधन की स्थाई वार्ता तंत्र में यह मामला सामने आया है।

4500 कर्मचारियों को वितरण

सूत्रों के अनुसारन सेफ्टी शूज और रेन कोट का वितरण रेल ट्रेक में काम करने वाले गैंगमेन, प्वाइंटस मैन, ट्रेक मेन आदि कर्मचारियों को जुलाई-अगस्त में वितरत किए गए थे। रेन कोट और शूज मंडल के करीब 4500 कर्मचारियों को वितरत किए गए। शूज लेदर के होने चाहिए थे जो इंडस्ट्री में काम में लाया जाता है। वहीं रेनकोट भी ए ग्रेड क्वालिटी के बांटे जाने थे लेकिन इसमें घालमेल किया गया। अक्टूबर में ही लोगों के शूज और रेनकोट ने जवाब दे दिया।
कमेटी में दिखाया कुछ भेजा कुछ

जानकारों के अनुसार रेल में आपूर्ति की जाने वाले सामानों की जांच राइड संस्था के माध्यम से की जाती है जो एप्रूवल देती है। जांच कमेटी के समक्ष आपूर्ति प्रदाता एजेंसी ने सामग्री तो बेहतर क्वालिटी की पेश की गई जिसके आधार पर एप्रूवल दिया गया। लेकिन जब रेल कर्मियों को इसका वितरण किया गया तो सामग्री निम्नगुणवत्ता की प्रदान कर दी गई। जिसके कारण शूज के सोल क्रेक हो गए तो वहीं रेन कोट छिन्ने लगे तो वहीं उनपर चढ़ी वाटर प्रूफ पर्त भी निकलने लगी।

1400 के शूज 500 लायक भी नहीं

शूज की कीमत करीब 1400 रुपए आंकी गई थी। देखने में शूज लैदर लुक में थे जब इसे पहनकर गैंग मेन ट्रेक पर निकले तो शूज के सोल बीच से क्रेक हो गए तो वहीं साइड से कट गए। जबकि उच्च क्वालिटी के लैदर शूज 2 से 3 साल तक चलते हैं लेकिन यह 3 माह के अंदर ही खराब हो गए जिससे रेल कर्मचारियों में भी खासी नाराजगी व्याप्त हो गई। कई रेल कर्मियों ने बांटी गई सामग्री को वापस कर दिया गया है।

-रेल कर्मियों को सेफ्टी शूज एवं रेनकोट में बड़ी गड़बड़ी हुई है। घटिया क्वालिटी की सामग्री का वितरण रेल कर्मियों को कर दिया गया है। संबंधित एजेंसी पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए। इस मामले की शिकायत हमने रेल महाप्रबंधक से की है।
-मुकेश गालब, जनरल सेकेट्री, डब्ल्यूसीआरईयू पमरे