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तेंदुए के पेट में थे घाव, बिलबिला रहे थे कीड़े

डला से देर रात आए तेंदुए का वेटरनरी एक्सपर्ट कर रहे उपचार, रात 1 बजे गंभीर अवस्था में जबलपुर लाया गया तेंदुआ, अभी हालत अिस्थर बनी

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जबलपुर.
मंडला से देर रात जबलपुर वेटरनरी अस्पताल लाए गए घायल तेंदुए का इलाज वेटरनरी एक्सपर्ट की टीम द्वारा किया जा रहा है। चिकित्सों द्वारा जब जांच की गई तो तेंदुए के शरीर में कई घाव मिले जिनमे कीड़े भी लग गए थे। ऐसा संभावना जताई जा रही है कि उक्त तेदुआं लंबे समय से बीमार था। तेदुएं के घाव का साफ करने के साथ ही उसे एंटीबायोटिक एवं अन्य दवाईयां दी गई हैं। फिलहाल तेंदुए की िस्थति अभी अिस्थर बनी हुई है। वेटरनरी चिकित्सकों की देखरेख में नजर रखी जा रही है।
पेरालिसिस से पीडि़त तेंदुआ
जांच में यह बात भी सामने आई कि तेदुएं के पिछले दोनो पैर पैरालिसिस से ग्रस्त हैं। जिसके कारण वह चलने फिरने में असमर्थ हो गया है। वेटरनरी विशेषज्ञों द्वारा पैरों का एक्सरे लिया गया। यह अच्छी बात थी कि पैरों की हड़डी कहीं से भी टूटी नहीं मिली है। अन्य जांचों के लिए तेंदुए के खून के सेम्पल लिए गए हैं जिसकी लोबेट्ररी में जांच की जा रही है। तेंदुआ कही सीवीडी बीमारी से पीडि़त तो नहीं इै इस बात का भी पता लगाया जा रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी का खुलासा हो सकेगा। कान्हा नेशनल पार्क के वेटरनरी चिकत्सक डॉ. संदीप अग्रवाल ने कहा कि शिकार जैसी कोई भी बात सामने नहीं आई है। न ही शरीर में इस तरह के निशान मिले हैं।
यह है मामला
विदित हो कि मंडला जिले के पश्चिम वन मंडल, बम्हनी परिक्षेत्र अंतर्गत टाटरी बीट कक्ष में मंगलवार को तेंदुएं को घायल अवस्था में देखा गया था। तेंदुआ चोट के कारण चलने में असमर्थ था। गांव के लोगों की नजर जब तेंदुएं पर गई तो लोगों ने कान्हा पार्क प्रबंधन एवं वन विभाग के अधिकारियों को दी। तेंदुए का रेस्क्यू कर रात में जबलपुर लाने का निर्णय लिया गया। कान्हा पार्क प्रबंधन की टीम देररात 1 बजे तेंदुए को लेकर जबलपुर पहुंची जहां उपचार शुरू किया गया।
… -मंडला से देर रात लाए गए तेदुएं का चिकित्सकों की टीम द्वारा उपचार किया जा रहा है। जांच में कई जगह घाव मिले हैं। जांचे पूरी होने के बाद ही बीमारी की स्थति स्पष्ट हो सकेगी।
डॉ.आरके शर्मा, डीन वेटरनरी कॉलेज