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किचन की इन 6 चीजों से आपको हो सकता है ‘कैंसर’, छोड़ दें इस्तेमाल

MP News: स्टेट कैंसर अस्पताल जबलपुर के डॉ. राजेश जैन के अनुसार कुल मरीजों में 15% पेट के कैंसर के हैं।

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प्रभाकर मिश्रा

MP News: किचन, बेडरूम से लेकर डायनिंग रूम में जिन साधनों का आप निश्चिंत होकर उपयोग कर रहे हैं, वे कैंसर के छिपे कारणों में से एक हैं। इनमें नॉन स्टिक पैन, एल्युमीनियम फॉयल से लेकर पानी की बोतल, डिब्बाबंद खाना, सुगंधित मोमबत्ती, प्लास्टिक चॉपिंग बोर्ड जैसे घरेलू उत्पाद भी शामिल हैं। कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार, इन उत्पादों के नियमित उपयोग से कैंसर का खतरा बढ़ रहा है। इनमें मौजूद रसायनों और यौगिकों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

कुल मरीजों में 15% पेट के कैंसर

ऐसे ही कारणों से पिछले डेढ़ दशक में पेट के कैंसर के मरीज बढ़े हैं। आंतों से लेकर, पैंक्रियास और लीवर को भी नुकसान पहुंच रहा है। स्टेट कैंसर अस्पताल जबलपुर के डॉ. राजेश जैन के अनुसार कुल मरीजों में 15% पेट के कैंसर के हैं। घर में उपयोग किए जा रहे उत्पाद में मौजूद कुछ रसायनों और यौगिकों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

वैज्ञानिक डॉ. पीआर देव के अनुसार एल्युमीनियम फॉयल में भोजन रखने पर एल्युमीनियम भोजन में घुल सकता है। ऐसे एल्युमीनियम से न्यूरोटॉक्सिसिटी और संभावित कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है।

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प्लास्टिक कंटेनर में बचा खाना खतरनाक

स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट के विशेषज्ञ डॉ. श्यामजी रावत ने बताया, नॉनस्टिक पैन के लेयर में पॉलीफ्लोरोएल्काइल रसायन होता है। पैन के ज्यादा गर्म होने पर यह रसायन भोजन में घुल सकता है। यह कैंसर का कारण है। वहीं, प्लास्टिक के कंटेनर में बचा हुआ खाना रखना भी सुरक्षित नहीं है। प्लास्टिक में बिस्फेनॉल ए या फ्थेलेट्स होते हैं। ये स्तन और प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम बढ़ा सकते हैं। ऐसा ही प्लास्टिक के कंटेनर और पानी की बोतलों में भी होता है।