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रुला देगी यह दर्द भरी दास्तां, पहचान के लिए तरसता बिन ब्याही मां का बेटा

आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए युवती लगा रही थाने के चक्कर

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Rape

जबलपुर। अभी-अभी नवरात्र के दिन बीते हैं। आदि शक्ति की पूजा की गई। कन्याभोज हुए। सदियों से ऐसा हो रहा है। होना भी चाहिए। इन आयोजनों से समाज सुधार होते हैं। कई तरह के सामाजिक विकार दूर होते हैं। लेकिन, इसी समाज की यह दर्दभरी दास्तां भी दिल-दिमाग को झकझोरने वाली है। धार्मिक महोत्सवों की रोशनी में एक बिन ब्याही मां थाने के चक्कर काट रही है। उसे पता नहीं है कि उसकी शक्ति क्या है? उसे यह भी नहीं पता कि आदि शक्ति क्या है? उसे तो सिर्फ जानना है कि आखिर उसके मासूम बेटे को किस गलती की सजा मिल रही है? वह यह नहीं कह रही है कि उसे कोई राज-पाट दे दिया जाए। वह तो यह भी नहीं चाहती कि उसे आदि शक्ति माना जाए। उसे सिर्फ अपने बेटे को पिता का नाम चाहिए। लेकिन, अफसोस! वह इसके लिए थाने का चक्कर काटने को मजबूर है। सवाल पूछा ही जाएगा कि आखिर युवती की गलती क्या है? उसने किसी युवक से परिचय कर लिया, क्या यह अपराध है? हैवान बना युवक चाकू के नोक पर बलात्कार करता है। असल में गलती सामाजिक संस्कारों की है। युवक को उसके परिजन ने शायद यह नहीं बताया कि वह भी किसी महिला का ही बेटा है। सवाल यह है कि समाज क्या करे? जवाब सीधा सा है, ऐसे नरपिशाचों को समाज में जगह नहीं मिले। पुलिस अपना काम ईमानदारी से करे। सिर्फ ईमानदार ही नहीं पुलिस को भावुक भी होना पड़ेगा। कानूनी पन्नों, धाराओं से तो पीडि़त को न्याय मिलने की उम्मीद नजर नहीं आती।
कैसे बने प्रमाणपत्र
बिना ब्याही मां बनी 28 वर्षीय युवती 10 माह के बेटे का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए भटक रही है। उसकी मुश्किल यह है कि प्रमाण-पत्र बनाने के पहले पिता का नाम पूछा जाता है। जैविक पिता बेटे और उसे अपनाने को तैयार नहीं है। युवती अपनी पीड़ा लेकर कई महीने से तिलवारा थाने का चक्कर लगा रही है, लेकिन अब तक शिकायत दर्ज नहीं की गई। पुलिस का रवैया बेहद प्रताडऩा वाला रहता है। पीडि़त युवती न्याय की गुहार लगाने के लिए थाने पहुंचती है। लेकिन, हरबार वहां मौजूद पुलिस वाले सादे कागज पर शिकायत लेकर पीडि़त को भगा देते हैं। युवती वहां से निराश होकर फिर घर चली जाती है। कुछ दिन बाद दोबारा थाने जाती है, तो कहा जाता है मामला जांच में है। लेकिन, यह नहीं बताया जाता कि जांच कब तक चलेगी। युवती की हालत देखकर किसी को भी रोना आ जाए। लेकिन, पुलिस जांच के मामले में युवती का दर्द फिलहाल कोई असर नहीं डाल रहा।
पीडि़त के नहीं माता-पिता
युवती के अनुसार उसके माता-पिता नहीं है। घर में छोटा भाई है। एक साल पहले युवती की पहचान खटीक मोहल्ला निवासी 34 वर्षीय युवक से हुई। वह अक्सर उसके घर आता-जाता था। 26 फरवरी 2018 को युवती घर पर अकेली थी, तभी युवक ने चाकू की नोक पर उससे बलात्कार किया। युवती गर्भवती हुई, तो आरोपी ने शादी करने का आश्वासन देकर गर्भपात कराने से मना कर दिया। 24 नवम्बर 2018 को उसने बेटे को जन्म दिया। युवती बेटे को लेकर युवक के घर पहुंची, तो उसके भाई और मां ने मारपीट कर भगा दिया। तब से वह बेटे के साथ अकेले रह रही है। युवती के अनुसार पिता का नाम नहीं होने से उसक बेटे का जन्म प्रमाण-पत्र नहीं बन रहा है। पीडि़त युवती के अनुसार बलात्कार करने का आरोपी भी अब उसकी जान का दुश्मन बन गया है। युवती का दर्द यह है कि वह शादी के झांसे में आ गई। आरोपी की बातों में फंसकर उसने बच्चे को जन्म दिया। लेकिन, अब आरोपी भी पहचानने से इनकार कर रहा है।