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तीन एजेंसियां पहरेदार, फिर भी भ्रष्टाचार, एमपी का गजब हाल

एंटी करप्शन डे पर विशेष-भ्रष्टाचार रोकने के लिए पहरेदारी करती हैं तीन एजेंसियां, फिर भी बिना ‘मुंह मीठा’ कराए नहीं होता काम, बैंक, इनकम टैक्स, राजस्व, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, पुलिस विभाग के खिलाफ सबसे अधिक कार्रवाई

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Corruption

जबलपुर. रिश्वतखोरों पर अंकुश लगाने के लिए शहर में एक केंद्रीय और दो राज्यस्तरीय एजेंसी हैं। इसके बावजूद रिश्वतखोरी से निजात नहीं मिल रही है। सरकारी कार्यालयों में हर छोटे-बड़े काम के बदले ‘मिठाई’ की मांग आम बात है। बैंक, इनकम टैक्स, राजस्व, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी, पुलिस जैसे विभागों में रिश्वतखोरी की सबसे अधिक शिकायतें आती हैं। बीते 11 महीने में सीबीआई, लोकायुक्त और ईओडब्ल्यू की कार्रवाई में कई चेहरे बेनकाब हुए।
सैकड़ों प्रकरण शासन की मंजूरी न मिलने से अटके
एंटी करप्शन डे पर ‘पत्रिका’ ने रिश्वत के खिलाफ की गई कार्रवाई की पड़ताल की तो कई चर्चित मामले सामने आए। इस वर्ष सबसे चर्चित कार्रवाई ईओडब्ल्यू की थी। पीएचई के रिटायर्ड एसडीओ सुरेश उपाध्याय की लगभग 400 करोड़ की बेनामी सम्पत्ति उजागर कर उसे विशेष कोर्ट से अंतरिम आदेश तक अटैच कराया गया। लोकायुक्त ने 25 करोड़ की सम्पत्तियां इस वर्ष राजसात कराई। इसके बावजूद दोनों एजेंसियों के 200 प्रकरण शासन की मंजूरी नहीं मिलने से लम्बित हैं। इनके आरोपी शासकीय कर्मी पूर्व की तरह अहम जिम्मेदारी सम्भाल रहे हैं।
रिश्वत से होती है जमीन की नाप-जोख
भ्रष्टाचार की सबसे अधिक शिकायतें राजस्व विभाग से जुड़ी हैं। जमीन की नाप-जोख कराना हो गया नामांतरण की फाइल आगे बढ़वाना हो, अधिकारी की जेब गरम किए बिना कुछ नहीं होता। पटवारी और लेखापाल के खिलाफ ट्रैप की सबसे अधिक कार्रवाई लोकायुक्त ने इस वर्ष की है।

IMAGE CREDIT: patrika

लोकायुक्त की कार्रवाई
केस-एक
29 सितम्बर 2019 को लोकायुक्त ने उद्यानिकी विभाग के संयुक्त संचालक को उसके शासकीय बंगले से 25 लाख रुपए का बिल पास कराने के एवज में एक लाख रुपए रिश्वत लेते दबोचा।
ट्रैप 56
पद का दुरुपयोग 08
बेनामी सम्पत्ति 05
चालान 43
सजा-55
प्राथमिक जांच में 25
आवेदन जांच लम्बित 1700
बड़ी कार्रवाई-जीएन पाठक, आरआर दुबे, जीएन सिंह, सेवकराम भारती की 25 करोड़ की सम्पत्ति राजसात कराई। सेवकराम भारती की पूरी सम्पत्ति, इंजीनियर आरआर दुबे की कटंगा स्थिति एचआईजी बंगला व नकदी, जीएन सिंह की 1.76 करोड़ नकदी सहित कोलकाता, पूना, बनारस व जबलपुर की सम्पत्तियां, जीएन पाठक की 10 करोड़ की सम्पत्ति राजसात कराई गई।
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ईओडब्ल्यू की कार्रवाई
केस-दो
25 जून 2019 को पीएचई के रिटायर्ड एसडीओ सुरेश उपाध्याय की लगभग 400 करोड़ की बेनामी सम्पत्ति उजागर की। विशेष कोर्ट से बेनामी सम्पत्ति को अंतरिम आदेश तक अटैच कराया।
छापा 05
एफआईआर 12
जांच में 15
शिकायतें प्राप्त 65
बड़ी कार्रवाई : पीएचई के रिटायर्ड एसडीओ की 400 करोड़ रुपए की बेनामी सम्पत्ति का खुलासा करने के बाद विशेष कोर्ट से उसे अंतरिम आदेश तक अटैच कराया। अधिनियम 1944 के 2018 संशोधन के बाद सम्पत्ति अटैच करने की प्रदेश की यह पहली बड़ी कार्रवाई थी।
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सीबीआई की कार्रवाई
केस-तीन
27 अगस्त 2019 को सीबीआई ने ईपीएफओ क्षेत्रीय कार्यालय जबलपुर में पदस्थ प्रवर्तन अधिकारी संजय अग्रवाल को 50 हजार रुपए रिश्वत लेते दबोचा। उनके खिलाफ बेनामी सम्पत्ति का भी प्रकरण दर्ज किया गया।
कुल कार्रवाई 13
ट्रैप 04
आय से अधिक सम्पत्ति 01
फर्जीवाड़ा 07
हत्या 01
बड़ी जांच-नरसिंहपुर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में ब्रांच मैनेजर अन्वेश मिश्रा, हर्षित और अर्चना ने लोन में फर्जीवाड़ा कर 4.40 करोड़ रुपए की चपत लगाई है। इसी तरह कटनी में बरगी परियोजना में किसानों को दी जाने वाली मुआवजा राशि में चेक का क्लोन बनाकर 10 लोगों को 4.09 करोड़ का भुगतान किया गया।