
RDVV : Registration for admission will be done till 10th May
जबलपुर . रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में चल रही प्रवेश प्रक्रिया छात्रों के लिए गले की फांस बन गई है। प्रवेश प्रक्रिया को इतना गुत्थमगुत्थ कर दिया गया है कि छात्रों की समझ से बाहर हो गई है। जिसके चलते छात्रों को भी आसानी से पाठयक्रमों और उनमें प्रवेश की जानकारी नहीं मिल पा रही है। जिसके कारण छात्र विश्वविद्यालय से लेकर कॉलेज स्तर पर चक्कर लगा रहे हैं। इस बार विश्वविद्यालय द्वारा प्रवेश प्रक्रिया को तिहरे मोड पर लागू किया गया है। इसमें विश्वविद्यालय स्तर पर प्रवेश प्रक्रिया के साथ ही उच्च शिक्षा विभाग एवं कॉमन यूनिवर्सिटी इंट्रेस्ट टेस्ट के माध्यम से प्रक्रिया कराई जा रही हैं।
प्रमोशन और हेल्प डेस्क की कमी
विश्वविद्यालय द्वारा नई व्यवस्था छात्रों पर थोप दी गई। प्रवेश प्रक्रिया का पर्याप्त प्रचार-प्रसार नहीं किया गया है। इसके परिणामस्वरूप, छात्रों को यह जानकारी नहीं मिल पा रही है कि प्रवेश के लिए कौन सी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। इसके अलावा, विश्वविद्यालय में हेल्प डेस्क की कमी भी छात्रों की समस्याओं को और बढ़ा रही है। छात्रों को अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त करने के लिए कोई निश्चित स्थान नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी परेशानियाँ और बढ़ गई हैं। इस मामले को लेकर प्रवेश समिति और रादुविवि का ऑनलाइन सेंटर एक दूसरे पर पल्ला झाड़ने में लगे हैं।
आंकड़ों की जुबानी
1265 स्नातक स्तर पाठ्यक्रम
955 सीट स्नातक स्तर की
310 सीट डिप्लोमा और सर्टिफिकेट
50 फीसदी हायर एजुकेशन
50 फीसदी यूटडीडी स्तर पर
यह लापरवाही
छात्रों के लिए नहीं बनी हेल्प डेस्क
नई व्यवस्था से शिक्षको को नहीं किया ट्रेंड
ऑनलाइन सेंटर में नहीं व्यवस्थाएं
विवि में ट्रेंड अमले का आभाव
यूजी के कई कोर्स में सीयूईटी से प्रवेश
विश्वविद्यालय में गत वर्ष तक सभी पाठ्यक्रमों में सिंगल प्रवेश प्रक्रिया अपनाई जाती थी। इस बार बैचलर ऑफ लाइब्रेरी साइंस, बैचलर ऑफ कंप्यूटर एप्लीकेशन, बीएससी ऑनर्स इन एग्रीकल्चर, बीजेएमसी, बैचलर ऑफ़ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्टस को सीयूईटी के माध्यम से जोड़ दिया गया है। इसके साथ ही एक दर्जन से अधिक विषयों को उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से भी भरा जा रहा है। इसमें पोस्ट ग्रेजुयशन के साथ डिप्लोमा कोर्स भी शामिल हैं।
छात्र और अभिभावक भी परेशान
छात्र रजनीश मलहोत्रा ने बताया कि प्रवेश प्रक्रिया को इतना पेंचीदा बना दिया गया है कि किस माध्यम से इसकी जानकारी ली जाए समझ में नहीं आती। जब वे रादुविवि के ऑनलाइन सेंटर पहुंचे तो यहां जिमेदारों ने एमपीऑनलाइन जाने का दो टूक जवाब दे दिया। ऐसे ही एक अन्य अभिभावक संदीप कश्यप भी अपनी बेटी के प्रवेश से जुड़ी जानकारी के लिए विवि पहुंचे लेकिन यहां कोई भी मदद नहीं मिली। अब उन्होनें निजी कॉलेज में प्रवेश दिलाने का मन बनाया है।
Published on:
12 Jul 2024 02:40 pm
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