जबलपुर। गाड़ी में नीली बत्ती लगी होने पर आरटीओ को भेजे गया नोटिस यातायात थाना प्रभारी और उनके स्टाफ के लिए मुसीबत बन गया है। मामले के तूल पकडऩे पर ट्रैफिक पुलिस को पता चला कि आरटीओ को नीली बत्ती लगाने की पात्रता है। इसी के साथ ट्रैफिक पुलिस बैकफुट पर आ गई। ट्रैफिक पुलिस के ही अफसर प्रयास कर रहे हैं कि नोटिस रद्द किया जाए।
ये है मामला
सितंबर 2015 में आरटीओ की नीली बत्ती लगी गाड़ी एमपी 20 टी 5000 की पुलिस ने तस्वीर खींच ली थी। इसके बाद आरटीओ को नोटिस जारी किया गया। नोटिस के माध्यम से नीली बत्ती लगाने पर उन्हें 500 रुपए जुर्माना थाने पहुंचकर जमा करने के निर्देश दिए गए थे। नोटिस मिलने के बाद आरटीओ जितेन्द्र रघुवंशी काफी नाराज हुए। उन्होंने कहा था कि यातायात पुलिस को नियमों की जानकारी नहीं है। नोटिस भेजने के पूर्व उन्हें यह पता करना चाहिए था कि आरटीओ को नीली बत्ती लगाने की पात्रता है या नहीं। सिटीजन कॉप पर आने वाले मामलों समेत ई-चालान के सारे नोटिस थाना प्रभारी द्वारा जारी किए जाते हैं। आरटीओ को जारी किए गए नोटिस से यह भी सवाल खड़ा हो गया है कि क्या थाना प्रभारी को भी नियमों की जानकारी नहीं है।
उठे सवाल
इस कारनामे के बाद ट्रैफिक पुलिस की जोन स्तरीय और जिला स्तरीय कार्यशालाओं पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अधिकारी दावा करते हैं कि सेमिनार में नियम बताए जाते हैं, लेकिन आरटीओ को भेजे गए नोटिस ने यह जाहिर कर दिया कि कार्यशाला कैसी होती है?
आरटीओ को गलत तरीके से नोटिस जारी किया गया है। नोटिस रद्द कराया जाएगा।