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जबलपुर. नेशनल थर्मल पावर कार्पोरेशन (एनटीपीसी) की ओर से नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा में स्थापित पावर प्लांट चालू करने की राह से बाधा हट गई है। मप्र हाईकोर्ट ने प्लांट के लिए विवादित २६ एकड़ जमीन के अधिग्रहण पर लगाई गई रोक हटा ली है। जस्टिस जेके महेश्वरी की सिंगल बेंच ने सशर्त स्टे वापस लेते हुए कहा कि एनटीपीसी दो माह के अंदर बीस करोड़ रुपए जमा करे।
यह है मामला
गाडरवारा तहसील के बरंझ निवासी अमित दुबे सहित तकरीबन १५ भू-स्वामियों ने याचिका दायर की है। इसमें कहा गया है कि प्लांट के भूमि अधिग्रहण में नियमों के अनुसार मुआवजा आदि नहीं दिया जा रहा। 21 नवम्बर 2016 को हाईकोर्ट ने विवादित २६ एकड़ जमीन के अधिग्रहण व निर्माण पर रोक लगा दी थी। इसके चलते प्लांट निर्माण के बाद भी इससे विद्युत उत्पादन नहीं किया जा रहा।
हर दिन मिलेगी दो करोड़ यूनिट बिजली
एनटीपीसी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि प्लांट के लिए कुल 1479 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की जा चुकी है। इस पर 9000 करोड़ रुपए लागत से प्लांट का निर्माण भी किया जा चुका है। इससे उत्पादन शुरू होने पर प्रदेश को प्रतिदिन दो करोड़ यूनिट बिजली मिल सकेगी। इसके अलावा दो करोड़ यूनिट बेची जा सकेगी। बाद में प्लांट चालू करने के लिए आवश्यक कोयला परिवहन के लिए रेल लाइन बिछाने के लिए 143 एकड़ भूमि अर्जित की गई। इसमें से 117 एकड जमीन निर्विवाद अधिग्रहीत की गई। लेकिन, 26 एकड़ पर याचिकाकर्ताओं ने विवाद खड़ा कर हाईकोर्ट की शरण ली।
हर महीने लग रहा साठ करोड़ ब्याज
एनटीपीसी की ओर से तर्क दिया गया कि तगड़ा निवेश करने के बावजूद प्लांट से बिजली उत्पादन नहीं किया जा सका है। इसके चलते कंपनी को हर माह करीब साठ करोड़ रुपए ब्याज चुकाना पड़ रहा है। अंतत: यह राष्ट्र और जनता के धन का नुकसान है।
याचिकाकर्ताओं की मांग
हर विस्थापित परिवार से एक सदस्य को नौकरी दी जाए।
प्रति एकड़ एक करोड़ रुपए के हिसाब से मुआवजा दिया जाए।
याचिकाकर्ताओं की बाकी २५२ एकड़ जमीन भी कंपनी अधिग्रहीत करे।
यह कहा कोर्ट ने
इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि पब्लिक सेक्टर ने तगड़ा निवेश कर बिजली उत्पादन के लिए प्लांट लगाया, लेकिन इस विवाद के चलते वहां जरूरी रेलवे लाइन नहीं बिछाई जा सकी।
याचिकाकर्ताओं ने अनुचित मुआवजे की बात कही है, लिहाजा कंपनी बीस करोड़ रुपए सम्बंधित अदालत में दो माह के अंदर जमा करे।
सम्बंधित कोर्ट की ओर से पारित अवार्ड के भुगतान में इस राशि का इस्तेमाल होगा।
जिसे भी अवार्ड से परेशानी हो, वह सम्बंधित अदालत में अपील कर सकता है।
Published on:
31 Dec 2017 05:30 am
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