साहित्याचार्य पं. दिनेश गर्ग के अनुसार गोस्वामी तुलसीदासजी का जन्म संवत् 1554 में श्रावण शुक्ल पक्ष की सप्तमी को उत्तर प्रदेश, चित्रकूट जिले के राजापुर गांव में आत्माराम दुबे के घर पर हुआ। उनकी मां का नाम हुलसी देवी था। जन्म के बाद ही मां चल बसीं। अभुक्त मूल नक्षत्र में जन्म के कारण पिता ने भी उन्हें एक दासी को सौंप दिया और खुद सन्यासी हो गए। तुलसीदास जी ने जन्मते ही राम का नाम लिया था इसलिए उनका नाम राम बोला रख दिया गया। फकीरी में यहां वहां विचरण करते हुए राम बोला यानी तुलसीदास जी की भेंट प्रसिद्ध संत नरहरि बाबा से हो गई। वे उन्हें साथ में अयोध्या ले गए। नरहरि बाबा ने संवत 1561 को उनका यज्ञोपवीप संस्कार कराया और उनकी शिक्षा दीक्षा का प्रबंध किया। उनका नाम तुलसीदास रखा। शास्त्रों के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी, गुरुवार, संवत् 1583 को 29 वर्ष की आयु में राजापुर में रहने वाली कन्या रत्नावली के साथ उनका विवाह हुआ।