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हाईकोर्ट के निर्देश पर रिवेलुएशन में बढ़े अंक, मूल्यांकनकर्ता पर दो हजार जुर्माना

चार सप्ताह में नई अंकसूची जारी करने का निर्देश  

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High Court of Madhya Pradesh

High Court of Madhya Pradesh

जबलपुर. मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर बारहवीं के छात्र की उत्तरपुस्तिका का रेवेलुएशन किया गया तो उसके 5.5 अंक बढ़ गए और वह फेल होने से बच गया। जस्टिस संजय द्विवेदी की सिंगल बेंच ने मूल्यांकन में लापरवाही बरतने के लिए मूल्यांकनकर्ता पर दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया। कोर्ट ने मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल को निर्देश दिए कि चार सप्ताह के अंदर याची छात्र को नई अंकसूची जारी की जाए। जबलपुर निवासी सत्यम कुमार चढ़ार की ओर से अधिवक्ता शांतनु अयाची व विपुलवर्धन जैन ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता एक होनहार छात्र है। उसे बारहवीं कक्षा में रसायनशास्त्र विषय में केवल 30 अंक मिले। असंतुष्ट होकर उसने नए सिर से मूल्यांकन की मांग की। लेकिन माशिमं की ओर से कहा गया कि नियमानुसार उत्तर पुस्तिका के अंकों की पुनर्गणना ही होगी, रेवेलुएशन नहीं। पुनर्गणना में भी अंकों में बदलाव नहीं हुआ। इस पर हाईकोर्ट की शरण ली गई। हाईकोर्ट के निर्देश पर छात्र की रसायनशास्त्र की उत्तरपुस्तिका का पुनर्मूल्यांकन किया गया। इस प्रक्रिया में साढ़े पांच अंक बढ़े। छात्र के रसायनशास्त्र विषय के प्राप्तांक बढ़कर साढ़े 35 हो गए। इससे वह फेल होने से बच गया। तर्क दिया गया कि पूर्व मूल्यांकनकर्ता की लापरवाही इससे स्पष्ट है। उस पर जुर्माना लगाया जाए। अंतिम सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अंक बढ़ाकर नई अंकसूची जारी करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने पूर्व मूल्यांकनकर्ता पर लगाया गया जुर्माना उससे वसूलने की माशिमं को छूट दे दी।