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बेखौफ नर पिशाच, शर्मसार वर्दी!!!

वाह रे जबलपुर पुलिस! अपहरणकर्ताओं की घेराबंदी का जाल बिछाने के बजाय विभागीय मुखिया की आवभगत में बिछ गए थे। पुलिसिंग की ये कैसी दक्षता है, जो सांप गुजर जाने के बाद लकीर पीटना ही हाथ आता है।

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jabalpur; Unfair male vampire, shameful uniform

jabalpur; Unfair male vampire, shameful uniform

गोविन्द ठाकरे
हे मां! नवरात्र के पावन पर्व पर ये क्या अनर्थ हो गया? एक मासूम बच्चे का क्रूर ढंग से कत्ल! पूरा शहर स्तब्ध, नि:शब्द, बेबस, लाचार है। आज दुखद अहसास से घिरा हर शहरी मासूम और पीडि़त परिवार से शायद यही कह रहा है माफ करना। आक्रोश भी उतना ही है। क्योंकि, 'नर पिशाचोंÓ की क्रूरतम करतूत से मानवता शर्मसार हुई है। हमारा नाकारा सिस्टम भी मासूम के अपहरण और हत्या का कम दोषी नहीं है। किसी भी अपहण कांड में शुरू के 24 घंटे अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन वाह रे जबलपुर पुलिस! अपहरणकर्ताओं की घेराबंदी का जाल बिछाने के बजाय विभागीय मुखिया की आवभगत में बिछ गए थे। पुलिसिंग की ये कैसी दक्षता है, जो सांप गुजर जाने के बाद लकीर पीटना ही हाथ आता है। पुलिस के लिए इससे शर्मनाक शायद ही कुछ और हो। अपराधों की समीक्षा करने जबलपुर आए डीजीपी के पास इतना भी समय नहीं था कि पीडि़त परिवार से मिलकर ढांढस बंधाते। बच्चे को सुरक्षित छुड़ाने के लिए आश्वस्त करते। उधर, बेखौफ अपहरणकर्ता बच्चे की पिता से बात करवा कर फिरौती के लिए दबाव बना रहे थे। डरा-सहमा बच्चा रोते-बिलखते कहता रहा-'पापा अकेले ही आना, ये बहुत बुरे लोग हैं।Ó दिशाहीन जांच के साथ पुलिस अपहरणकर्ताओं को जल्द पकड़ लेने का सिर्फ दावा ही करती रही। आखिरकार वही हुआ, जिसका डर था। कारोबारी पिता से मोटी फिरौती लेने के बाद भी नरपिशाचों ने बच्चे की जान ले ली। बच्चे की यातनाओं के बारे में सोच कर कलेजा हलक में आ जाता है। सिस्टम और समाज के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उस मासूम का क्या कुसूर था? कलेजे के टुकड़े को खोने वाले माता-पिता की तड़प और आंसू बेटे के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं। जघन्य कांड के बाद व्यापारी वर्ग की नाराजगी का गुबार फूटा है। उन्होंने सड़कपर जाम लगाकर अपराध नियंत्रण में नाकाम पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस को अपनी नाकामी का जवाब तो देना ही होगा। ऐसी पुख्ता क्राइम फाइल बननी चाहिए कि दरिंदों को कड़ी से कड़ी सजा मिले। सिस्टम अपने गिरेबां में झांके। पुलिस महकमे को शर्मसार भी होना पड़ेगा। खुद से सवाल करना होगा कि आखिर शहर की कानून व्यवस्था खंड-खंड क्यों हो गई है? अपराधी बेखौफ क्यों हो गए हैं? संस्कारों की नगरी जबलपुर में हर हाल में अमन-चयन बना रहे यह सुनिश्चित करना होगा। आखिर में देवी मां से प्रार्थना है कि 'हे मां पाश्विक प्रवृत्तियों का नाश करें। ताकि, मासूम बेटे-बेटियां सुरक्षित रहें। मानवता का कल्याण हो!