
Use of fly ash bricks increased in Jabalpur
जबलपुर। हल्की, मजबूत और तापरोधी जैसे कई गुणों के कारण राख (फ्लाई ऐश) से बनी ईंटों की मांग में उछाल आया है। जबलपुर में दो दर्जन इकाइयों में इसका उत्पादन हो रहा है। शहर में चल रहे बड़े प्रोजेक्ट में भी फ्लाई ऐश से बनी ईंटों का उपयोग हो रहा है।
औद्योगिक क्षेत्र और निजी भूमि पर फ्लाई ऐश से ईंट बनाने वाली इकाइयों की स्थापना हो रही है। खपत बढऩे से नए निवेशक भी आगे आ रहे हैं। इससे रोजगार के साधन में भी इजाफा हो रहा है। एक छोटी इकाई में 15-20 ओर बड़ी इकाइयों में एक सैकड़ा से ज्यादा लोगों की आवश्यकता होती है। शहर में कुछ बड़ी कम्पनियां भी इकाई लगाने की योजना बना रही हैं।
लाल ईंट सस्ती होने के बाजवूद बिल्डर्स फ्लाइ ऐश से बनी ईंटों का उपयोग कर रहे हैं। वर्तमान में ज्यादातर सरकारी प्रोजेक्ट में भी इसी ईंट का उपयोग हो रहा है। इन विभागों ने ईंट का आकार भी तय किया है। एएसी ब्लॉक की खपत भी पहले की तुलना में ज्यादा बढ़ी हैं।
अनुपयोगी मटेरियल खपने से प्रदूषण में कमी
यह ग्रीन प्रोडक्ट है। इसे बिजली संयंत्रों से निकलने वाली राख से तैयार किया जाता है। इस राख का कोई उपयोग नहीं होता। इसे नष्ट करना बड़ी चुनौती है। इसका सदुपयोग ईंट बनाने में किया जाने लगा है। इसमें सीमेंट और क्रशर ने निकलने वाली डस्ट का उपयोग किया जाता है। कुछ कैमिकल भी उपयोग होते हैं। लेकिन इसकी मात्रा कम रहती है। इसलिए यह पर्यावरण के अनुकूल भी होती है। बिजली संयंत्रों में पकने के कारण यह राख तापरोधी भी हो जाती है।
बड़ी परियोजनाओं में हो रहा उपयोग
शहर में अभी 200 से अधिक छोटे एवं बड़े हाउङ्क्षसग प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इनमें जो बड़े प्रोजेक्टस हैं, उनमें यही ईंट इस्तेमाल की जाती है। क्रेडाई जबलपुर के अध्यक्ष धीरेश खरे ने बताया कि यह महंगी है लेकिन दूसरे खर्चे बचने के कारण यह उपयोगी है। पर्यावरण के लिहाज से भी इसकी मांग हो रही है। सचिव दीपक अग्रवाल का कहना है कि लाल ईंट का उपयोग बंद नहीं हुआ लेकिन कई वजहों से कॉलोनाइजर्स फ्लाई ऐश से बनी ईंट मकान और फ्लैट बनाने में कर रहे हैं।
Published on:
01 Nov 2022 06:01 pm
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