भगवान गणेश का ये मंत्र करता है अमंगल को मंगल, जानें मंत्र की शक्ति
जबलपुर। प्रथम पूज्य भगवान गणेश का पूजन करना यानि शुभ और मंगल समाचारों से जीवन का भर जाना है। भगवान गणेश जहां शुभता के प्रतीक माने जाते हैं, वहीं सुख समृद्धि के कारक भी हैं। इन्हें मंगल कार्यों के लिए विशेष रूप से पूजा जाता है। जितनी इनकी पूजा आसान है, उतनी ही इनकी सेवा। भगवान केवल दूर्वा से ही प्रसन्न हो जाते हैं। मोदक और लड्डू का भोग भी इन्हें प्रिय है। ज्योतिषाचार्य सचिनदेव महाराज के अनुसार गणेश मंत्रों का नित्य जाप करने से जीवन में कठिनाइयों का दौर समाप्त हो जाता है। वहीं आने वाली बाधाएं भी दूर हो जाती है। सारे विघ्र दूर होकर व्यक्ति की राह आसान बना देते हैं।
भगवान शिव के पुत्र गणेश भारतीय धर्म और संस्कृति में सबसे पहले पूजनीय और प्रार्थनीय हैं। उनकी पूजा के बगैर कोई भी मंगल कार्य ना तो किया जा सकता है और ना ही शुरू हो सकता है। कहते हैं उनकी पूजा के बगैर अगर कोई कार्य शुरू कर देता है तो किसी न किसी प्रकार उसको रुकावटें आने लगती हैं।
भगवान गणेश की पूजा बुद्धि, ज्ञान, बल व सुख-समृद्धि देने वाली मानी जाती है। जो व्यक्ति गणपति बप्पा को सच्चे मन से पूजता है उसको भगवान कभी निराश नहीं करते। उसकी सभी मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। क्या आप जानते हैं कि भगवान गणेश की पूजा खास मंत्रों से की जाती है। जा हां खास मंत्रों में तो क्या हैं वो मंत्र। भगवान गणेश के वो खास 3 मंत्र जिनका जप करने के बाद आप उनकी कृपा पा सकते हैं।
वक्रतुण्ड महाकाय मंत्र-
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्य कोटी समप्रभा
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्व-कार्येशु सर्वदा
इसका अर्थ है कि हे वक्रतुण्ड, महाकाय, करोड़ों सूर्यों के समान प्रकाश देने वाले देव (गणेश), मेरे सभी कार्य बिना विघ्न के संपन्न हों। धर्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश जी को बुधवार के दिन दुर्वा अर्पित करें । शुद्ध आसन में बैठकर सभी पूजन सामग्री को एकत्रित कर पुष्प, धूप, दीप, कपूर, रोली, मौली लाल, चंदन, मोदक का भोग लगाकर गणेश भगवान को समर्पित करें।
तांत्रिक गणेश मंत्र-
ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरू गणेश।
ग्लौम गणपति, ऋदि्ध पति, सिदि्ध पति। मेरे कर दूर क्लेश।
यह एक तांत्रिक मंत्र है जिसकी साधना में कुछ खास चीजों का ध्यान रखना पड़ता है। परन्तु रोज सुबह महादेवजी, पार्वतीजी तथा गणेशजी की पूजा करने के बाद इस मंत्र का 108 बार जाप करने व्यक्ति के समस्त सुख-दुख तुरंत खत्म होते हैं। लेकिन इस मंत्र के प्रयोग के समय व्यक्ति को पूर्ण सात्विकता रखनी होती है और क्रोध, मांस, मदिरा, परस्त्री से संबंधों से दूर रहना होता है।
गणेश कुबेर मंत्र-
ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा।
यदि व्यक्ति पर अत्यन्त भारी कर्जा हो जाए, आर्थिक परेशानियां आए-दिन दुखी करने लगे। तब गणेशजी की पूजा करने के बाद गणेश कुबेर मंत्र का नियमित रूप से जाप क रने से व्यक्ति का कर्जा चुकना शुरू हो जाता है तथा धन के नए स्त्रोत प्राप्त होते हैं जिनसे व्यक्ति का भाग्य चमक उठता है।