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वीयू कराएगा अपने ओआरएस को पेटेंट, 3 साल अनुसंधान के बाद बनाया

वेटरनरी विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किया गया ओरल रिहाईड्रेशन साल्यूशन यानी ओआरएस पशुपालकों के बीच धूम मचा रहा है।

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reetesh pyasi

Dec 21, 2016

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जबलपुर। वेटरनरी विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किया गया ओरल रिहाईड्रेशन साल्यूशन यानी ओआरएस पशुपालकों के बीच धूम मचा रहा है। पशुओं के उपचार के दौरान अब तक किए गए दवा के उपयोग में सौ फीसदी नतीजे सामने आए हैं। देशी और सस्ती दवा होने के चलते किसानों और पशुपालकों द्वारा भी इसे हाथों-हाथ लिया जा रहा है। इस दवा को विश्वविद्यालय द्वारा 'पेटेंट' कराया जाएगा।

तीन वर्ष में बनी दवा
वेटरनरी विवि के मेडिसन विभाग को 3 साल के अनुसंधान के बाद दवा को तैयार करने में सफलता मिली है। डॉ.पीसी शुक्ला के साथ डॉ. अमिता तिवारी, डॉ.डीके गुप्ता, डॉ.अर्पणा रैकवार की टीम ने इसका निर्माण किया। टीम द्वारा दवा के इफेक्ट और साईड इफेक्ट को देखा गया। विश्वविद्यालय फिलहाल शासकीय कैम्पों, फार्म हाउस में इस दवा को प्रदान कर रहा है।

3 रुपए कीमत
जानकारों के अनुसार ओआरएस को बनाने में मात्र 3 रुपए खर्च होते हैं। जबकि बाजार में विभिन्न कंपनियों द्वारा बेचे जा रहे ओआरएस की कीमत 19 से 20 रुपए तक है। लिक्वड एवं साल्ड अवस्था में होने के कारण पशुओं में बीमारी के अनुसार इसका उपयोग किया जा सकता है।

व्यवसायिक उत्पादन पर विचार
विश्वविद्यालय इस दवा का व्यावसायिक उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। पेटेंट मिलने के बाद इस पर काम शुरू होगा। किसी मल्टीनेशनल दवा कंपनी के साथ टाईअप कर उत्पादन शुरू किया जाएगा।

पेटेंट की दिशा में प्रयास
इस दवा का अच्छा रिजल्ट मिला है। कृषकों, पशुपालकों तक जानकारी पहुंचा रहे हैं। रिजल्ट के बाद हम पेटेंट की दिशा में भी प्रयास कर रहे हैं।
डॉ.पीडी जुॅयाल, कुलपति वेटरनरी विवि

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