शत्रु सेना और घुसपैठियों के पर्वतों पर होने के कारण वायुसेना के विमानों की तैनाती की गई थी। उस समय ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया (ओएफके) में विविध तरह के बमों का उत्पादन कर सीधे युद्धस्थल पहुंचाया गया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार तात्कालिक आवश्यकताओं को देखते हुए थलसेना के लिए 5.5 लाख राउंड 30एमएम बीएमपी-2 बम, 1.5 लाख राउंड 30 एमएम बीएमपी-2 एचई/टी बम, वायुसेना के लिए 2,500 से अधिक 1000 एलबीएस यानी थाउजेंड पाउंडर बम भेजे गए थे। आकाश से थाउजेंड पाउंडर बम का बरसना और तोप से 30 एमएम बमों के विध्वंस से दुश्मन के होश फाख्ता हो गए। सबसे बड़ी बात यह थी कि उस समय 874.106 करोड़ रुपए के उत्पादन लक्ष्य के विरुद्ध 2250 कर्मचारियों की कमी थी, लेकिन दूसरे अनुभागों से कर्मचारियों को लाकर इस चुनौती को स्वीकार करते हुए उत्पादन किया गया।