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विजय दिवस: यहां के बारूद से मिली थी कारगिल विजय

दिन-रात मेहनत कर सप्लाई किया था गोला-बारूद, जबलपुर की बड़ी भूमिका, सेना की दो रेजीमेंट और फैक्ट्रियों से गया था असलहा

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neeraj mishra

Jul 26, 2016

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जबलपुर। कारगिल युद्ध में भारतीय सेना के जवानों के हाथों को मजबूत करने में शहर का योगदान भी कम नहीं था। आयुध निर्माणियों के कर्मचारियों ने उन्हें युद्धक साजो-सामान की कमी नहीं होने दी। गोला-बारूद, तोप और सैन्य वाहनों की सप्लाई सामान्य दिनों की तरह आपात स्थिति में भी की गई। मई और जुलाई 1999 में हुए युद्ध में चोटी पर बैठे पाकिस्तानी घुसपैठियों पर भारतीय सेना ने स्वीडन से मंगाई गई बोफोर्स तोप से हमला किया था। इसमें इस्तेमाल होने वाले गोलों की सप्लाई भी जबलपुर से की गई थी। फैक्ट्री कर्मचारी उत्साह के साथ उत्पादन करते रहे।

थल और वायुसेना की बढ़ाई ताकत

शत्रु सेना और घुसपैठियों के पर्वतों पर होने के कारण वायुसेना के विमानों की तैनाती की गई थी। उस समय ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया (ओएफके) में विविध तरह के बमों का उत्पादन कर सीधे युद्धस्थल पहुंचाया गया। आधिकारिक जानकारी के अनुसार तात्कालिक आवश्यकताओं को देखते हुए थलसेना के लिए 5.5 लाख राउंड 30एमएम बीएमपी-2 बम, 1.5 लाख राउंड 30 एमएम बीएमपी-2 एचई/टी बम, वायुसेना के लिए 2,500 से अधिक 1000 एलबीएस यानी थाउजेंड पाउंडर बम भेजे गए थे। आकाश से थाउजेंड पाउंडर बम का बरसना और तोप से 30 एमएम बमों के विध्वंस से दुश्मन के होश फाख्ता हो गए। सबसे बड़ी बात यह थी कि उस समय 874.106 करोड़ रुपए के उत्पादन लक्ष्य के विरुद्ध 2250 कर्मचारियों की कमी थी, लेकिन दूसरे अनुभागों से कर्मचारियों को लाकर इस चुनौती को स्वीकार करते हुए उत्पादन किया गया।

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एलएफजी और मोर्टार से फायर
गन कैरिज फैक्ट्री (जीसीएफ) ने भी कारगिल युद्ध के समय बड़ी भूमिका निभाई। दुश्मन को पीछे हटने में यहां बनी 105 एमएम लाइट फील्ड गन (एलएफजी) की खास भूमिका थी। 17 किमी तक मार करने वाली गन का सेना ने भरपूर इस्तेमाल किया था। उस समय करीब 45 गन सेना को भेजी गई थीं। हालांकि, इनका उत्पादन नियमित प्रक्रिया के तहत होना था, लेकिन युद्ध को देखते हुए इसमें तेजी लाई गई। इसी तरह 51 एमएम, 81 एमएम और 120 एमएम मोर्टार की सप्लाई की गई।

वीएफजे वाहनों से पहुंचाई रसद

वीकल फैक्ट्री जबलपुर (वीएफजे) ने भी उस समय आयुध निर्माणी बोर्ड के आदेश पर अतिरिक्त सैन्य वाहनों का उत्पादन किया था। फैक्ट्री ने एलपीटीए और स्टालियन सैन्य वाहन की आपूर्ति की थी। इन्हीं वाहनों से सैनिकों को कारगिल पहुंचाया गया था। इसमें रसद भी पहुंचाई गई थी। पांच हजार से ज्यादा वाहन सेना को सप्लाई किए गए थे।

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मोर्चो पर भेजी थीं दो रेजीमेंट
आयुध निर्माणियों के अलावा सैन्य दृष्टि से भी जबलपुर प्रमुख गढ़ रहा है। यहां मध्यभारत एरिया हेडक्वार्टर के अलावा दि ग्रेनेडियर्स रेजीमेंटल सेंटर, जम्मू एंड कश्मीर और वन सिग्नल टे्रनिंग सेंटर भी है। मध्यभारत एरिया ने मोर्च पर डटे जवानों की भरपूर मदद की। इसी तरह यहां से दो रेजीमेंट भी युद्ध के लिए भेजी गई थीं। दि ग्रेनेडियर्स रेजीमेंटल सेंटर और जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स के करीब 22 जवानों को तैनात किया गया था।

ये हैं प्रमुख सैन्य संस्थान

-दि गे्रनेडियर्स रेजीमेंटल सेंटर
-जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स
-वन सिग्नल टे्रनिंग सेंटर
-मध्यभारत एरिया हेडक्वार्टर
-506 आर्मीबेस वर्कशॉप
-सेंट्रल ऑर्डनेंस डिपो
-कॉलेज ऑफ मटेरियल मैनेजमेंट
-लॉन्गपू्रफ रेंज खमरिया

आयुध निर्माणिया
ऑर्डनेंस फैक्ट्री खमरिया
-गे्र आयरन फाउंड्री
-वीकल फैक्ट्री जबलपुर
-गन कैरिज फैक्ट्री

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