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यहां से निकलीं खेल की तीन देवियां, संस्कारधानी ने कहा आप पर गर्व है

जबलपुर की मुस्कान किरार, जानकी बाई को विक्रम, अंशिता को एकलव्य पुरस्कार    

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जबलपुर। खेल में संस्कारधानी की बेटियों ने एक बार फिर अपना परमच लहराया है। मध्य प्रदेश शासन के खेल विभाग द्वारा शुक्रवार को खेल रत्नों की घोषणा की गई। इसमें संस्कारधानी की तीन बेटियों के नाम भी शामिल हैं। इनमें आर्चरी खिलाड़ी मुस्कान किरार और दृष्टि दिव्यांग जानकीबाई को विक्रम अवॉर्ड और वुशु खिलाड़ी अंशिता पांडे को एकलव्य अवॉर्ड दिया गया है।

पिता ने दी ताकत
आर्चरी में मप्र आर्चरी एकेडमी जबलपुर समेत संस्कारधानी का नाम दुनिया में रोशन करने वाली मुस्कान किरार के सपने को पिता वीरेंद्र किरार ने ताकत दी। उन्होंने एक विज्ञापन पढ़ा और फिर बेटी का हाथ थाम उसे एकेडमी लेकर पहुंचे। मुस्कान का एकेडमी में चयन हुआ, तो कोच रिचपाल सिंह सलारिया ने मुस्कान के खेल को निखारा। मध्यमवर्गीय परिवार की बेटी मुस्कान ने कुछ ही समय में खेल का ऐसा लोहा मनवाया कि विश्व तीरंदाजी चैम्पियनशिप 2019 में मुस्कान ने कम्पाउंड इवेंट में रजत पदक जीता। इसके पूर्व 98 एशियन गेम्स में टीम इवेंट में भी मुस्कान रजत पदक जीत चुकीं हैं। मुस्कान के नाम कई राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय पदक हैं।

जूडो ने दी रोशनी
परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। इस कारण प्राथमिक शिक्षा पूरी करने का सपना भी अंधकार में डूब गया। लेकिन, वर्ष 2013-14 सिहोरा के ग्राम कुर्रो में रहने वाली दृष्टि दिव्यांग जानकीबाई गौड़ के जीवन में रोशनी बनकर आया। जूड़ो संघ के माध्यम से जानकीबाई ने ट्रेनिंग शुरू की और प्रदेश की पहली महिला दृष्टि दिव्यांग जूड़ो खिलाड़ी बनीं। उन्होंने पांच राष्ट्रीय पदक जीते हैं। पहली बार 2016 में राष्ट्रीय पैरा जूडो प्रतियोगिता में रजत, 2017 में नेशनल ब्लाइंड एंड डेफ जूडो चैम्पियनशिप में स्वर्ण, ताशकंद उज्बेकिस्तान में ओशिनिया चैंपियनशिप में महिला पैरा जूडो टीम का नेतृत्व किया और कांस्य पदक जीता है।

दिल से किया तप
वूशू मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग छह साल पहले शुरू करने वाली अंशिता ने पूरा ध्यान खेल पर लगाया। खेल की एक-एक बारीकी को समझा और उसे अमल में लाया। अन्य खिलाडिय़ों की अपेक्षा अंशिता ने अपने खेल को बेहतर बनाने के लिए अधिक समय दिया। छह सालों का तप है जो अंशिता इस मुकाम पर पहुंची। अंशिता के खेल को निखारने में कोच मनोज गुप्ता ने भी भरपूर योगदान दिया। अंशिता ने नेशनल वूशु स्पर्धाओं में सात स्वर्ण, सात रजत व दो कांस्य पदक सहित कुल 16 पदक जीते।