
mppkvvcl corruption scam in electric sub-stations operating in MP
जबलपुर। मध्यप्रदेश के प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों ने सिर्फ एनआरआई कोटे की प्रवेश प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा नहीं किया बल्कि स्टेट कोटे की सीटों में जमकर धांधली की गई। स्टेट कोटे में लगभग सात सौ छात्र-छात्राओं को गलत तरीके से मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिया गया। इस मामले में व्यापमं के व्हिसल ब्लोअर डॉ. आनंद राय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में 2012 से 2014 के बीच निजी मेडिकल कॉलेजों में स्टेट कोटे के तहत हुए प्रवेशों में अनियमितता का आरोप लगाया है। चीफ जस्टिस हेमंत गुप्ता की डिवीजन बेंच के समक्ष बुधवार को मामले की सुनवाई होनी थी, लेकिन समयाभाव के चलते नहीं हो सकी। अब इसकी सुनवाई 28 जनवरी को होगी।
व्यापमं की तरह मामला
याचिकाकर्ता ने वर्ष 2014 में दायर याचिका में आरोप लगाया है कि 2012 से 2014 के दौरान निजी मेडिकल कॉलेजों में स्टेट कोटे से हुए 721 दाखिलों में फर्जीवाड़ा किया गया और इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। याचिका में दलील दी गई कि व्यापमं द्वारा हुए फर्जी प्रवेश निरस्त किए जा चुके हैं। ज्यादातर आरोपी छात्र जेल में बंद हैं, तो स्टेट कोटे के अनियमित प्रवेशों पर क्यों रहम किया जा रहा है।
13 करोड़ रुपए का जुर्माना
याचिका में कहा गया है, पूर्व में एडमिशन अथॉरिटी ने निजी मेडिकल कॉलेजों पर इस अनियमितता के लिए 13 करोड़ का जुर्माना लगाया था। इस आदेश के खिलाफ निजी मेडिकल कॉलेज सुप्रीम कोर्ट चले गए। इस आधार पर इन कॉलेजों को मप्र हाईकोर्ट से जुर्माना अदा करने पर स्टे मिल गया। याचिका में बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने निजी कॉलेजों की यह याचिका निरस्त कर दी थी। इसके बावजूद जुर्माने के 13 करोड़ रुपए भी अब तक जमा नहीं किए गए।
सरकार पर मेहरबानी का आरोप
याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से ख़ारिज हुई याचिका की कॉपी को हाईकोर्ट में पेश नहीं किया। वरना सुप्रीम कोर्ट के याचिका खारिज करने के बाद 2016 में ही निजी कॉलेजों पर कार्रवाई हो गई होती। कहा गया कि जुर्माने पर लगा स्थगन हटाने के लिए भी सरकार की ओर से अर्जी नहीं दी गई। राय ने स्टेट कोटे से हुए उपरोक्त सभी 721 प्रवेश निरस्त करने की मांग की है।
Published on:
14 Dec 2017 09:26 am
बड़ी खबरें
View Allजबलपुर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
