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vyapam scam की तरह इस नामी एजुकेश इंस्टीट्यूट में सामने आया अंक घोटाला, प्राचार्य पर लगे नंबरों में हेराफेरी के आरोप

एमपी गवर्नमेंट ने प्राचार्य को किया सस्पेंड, तीसरे सेमेस्टर के सौ से अधिक छात्र-छात्राओं के नंबर बदले

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The problem of not settled government law colleges

The problem of not settled government law colleges

जबलपुर। व्यापमं घोटाले की जांच अभी पूरी भी नहीं हो पायी और प्रदेश के एक और शिक्षण संस्थान में फिर नंबरों की हेराफेरी का नया मामला खुल गया है। ये मामला प्रदेश के मॉडल इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का है। जहां, सौ से अधिक छात्र-छात्राओं के अंक बदल दिए गए। इस मामले में आरोप सीधे संस्थान के प्रमुख पर लगे है। इसके बाद राज्य सरकार ने आनन-फानन में करते हुए मॉडल आईटीआई के प्राचार्य को निलंबित कर दिया है। मामले की विभागीय जांच की शुरू कर दी गई है।

पोर्टल और चैकशीट के अंकों में फर्क
शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान तथा निजी संस्थानों के छात्र-छात्राओं की फरवरी 2017 में प्रेक्टिकल परीक्षा आयोजित की गई थी। इसमें पॉलीटेक्निक कॉलेज के प्राध्यापकों को पर्यवेक्षक बनाया गया था और उन्होंने चैकशीट में अंक भरे थे। इसके बाद प्राचार्य जीपी तिवारी ने पोर्टल में जो अंक भरे उनमें भारी अंतर था। जिन छात्र-छात्राओं को फेल किया गया, उनके नम्बर पास होने वाले छात्र-छात्राओं से भी अधिक थे। इसके बाद आरोप लगाए कि इस मामले में प्राचार्य ने मिलीभगत और लेन-देन किया गया फिर मनमाफिक अंक बढ़ा दिए गए।

दोबारा किए गए सस्पेंड
आईटीआई में प्रेक्टिकल अंकों में की गई हेराफेरी का मामला जब सामने आया तो प्राचार्य को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया। लेकिन वे शाम को ही वे वापस पदस्थ हो गए थे। इसके बाद तकनीकी शिक्षा एवं कौशल विकास विभाग भोपाल के उप सचिव सभाजीत यादव ने दोबारा उनका निलंबन आदेश जारी किया है। इस आदेश के अनुसार प्राइवेट आईटीआई के तृतीय सेमेस्टर के प्रशिक्षणार्थिंयों के प्रेक्टिकल अंकों में चैकशीट में लिखे गए अंकों तथा एमपी ऑनलाइन पोर्टल पर फीड अंकों में अंतर पाया गया, इसके आधार पर उन्हें दोषी मानते हुए तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया जाता है। निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय आईटीआई बरगी रहेगा।

100 से ज्यादा छात्रों के अंक बदले
आईटीआई में हुए इस अंक घोटाले को लेकर एनएसयूआई के सचिन रजक ने प्राचार्य पर 100 से अधिक छात्र-छात्राओं के नम्बर बदलने के आरोप लगाए है। एनएसयूआई का आरोप है कि प्राइवेट आईटीआई संचालकों से मिलीभगत करके प्राचार्य ने उनके स्टूडेंट्स को मनचाहे नंबर दिए। प्राचार्य की साठगांठ विभाग में उच्च पदस्थ अधिकारियों तक होने के कारण उनके निलंबन आदेश को भी पूर्व में बदल दिया गया। एनएसयूआई ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और दोषियों की सेवा समाप्त करने की मांग की है।